Polygenic Screening: अब हमेशा पैदा होंगे परफेक्ट बच्चे! यह तकनीक पहले ही बता देगी IQ लेवल
Polygenic Screening: पॉलिजेनिक स्क्रीनिंग को लेकर दावा है कि इससे बच्चे के पैदा होने से पहले उसके IQ और कुछ बीमारि का अंदाजा लगाया जा सकता है. जानें यह तकनीक क्या है और एक्सपर्ट्स क्यों चिंतित हैं.

Polygenic Screening Child IQ: आजकल एक नई तकनीक की काफी चर्चा हो रही है. इसका नाम है "पॉलिजेनिक स्क्रीनिंग". दावा किया जा रहा है कि इस तकनीक से बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसका IQ यानी वह कितना तेज दिमाग वाला हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. यह खबर अमेरिका की एक कंपनी "न्यूक्लियस जीनोमिक्स" से जुड़ी है. कंपनी के इस दावे के बाद इस तकनीक को लेकर काफी चर्चा हो रही है.
आखिर यह तकनीक क्या है?
जब कोई कपल IVF यानी टेस्ट ट्यूब बेबी के जरिए बच्चा पैदा करने की कोशिश करता है, तो डॉक्टर बच्चे के बनने की शुरुआती स्टेज में कई विकल्प तैयार करते हैं. पहले इनकी जांच करके यह देखा जाता था कि बच्चे को किसी बीमारी का खतरा तो नहीं है. लेकिन अब न्यूक्लियस जीनोमिक्स का कहना है कि जीन की जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि बच्चा आगे चलकर कितना होशियार हो सकता है, उसकी लंबाई कितनी हो सकती है, उसकी आंखों का रंग कैसा हो सकता है और बच्चे को किन बीमारियों का खतरा हो सकता है.
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"परफेक्ट बच्चा" चुनने का दावा
कंपनी का कहना है कि इस तरीके से माता-पिता अपने लिए एक बेहतर और होशियार बच्चा चुन सकते हैं. कंपनी इस सेवा के लिए करीब 6 हजार डॉलर यानी लगभग 5 लाख रुपये ले रही है.
कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ एक जानकारी देने का तरीका है. इसके बाद माता-पिता खुद फैसला कर सकते हैं. लेकिन कंपनी ने यह भी माना है कि IQ का यह अंदाजा पूरी तरह सही नहीं होता. यह सिर्फ एक अनुमान है. इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं है.
एक्सपर्ट्स क्यों परेशान हैं?
कई साइंटिस्ट और डॉक्टर इस तकनीक को लेकर चिंता जता रहे हैं. उनका कहना है कि इसको लेकर अभी कई सवाल हैं.
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यह पक्का जवाब नहीं देती- बच्चे का दिमाग सिर्फ जीन से तय नहीं होता. उसकी परवरिश, घर का माहौल, खाना-पीना और पढ़ाई का भी उस पर बहुत असर पड़ता है. इसलिए सिर्फ जीन देखकर बच्चे का IQ बताना पूरी तरह सही नहीं हो सकता
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एक जीन कई चीजों पर असर डाल सकता है- एक ही जीन शरीर की एक से ज्यादा चीजों पर असर डाल सकता है. इसलिए अगर किसी जीन को "IQ बढ़ाने वाला" मानकर चुना जाता है, तो हो सकता है कि आगे चलकर उसी जीन की वजह से कोई दूसरी बीमारी का खतरा बढ़ जाए.
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इससे गलत सोच बढ़ सकती है- कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि "बेहतर जीन" चुनने का यह तरीका पुरानी और खतरनाक सोच "यूजेनिक्स" की याद दिलाता है. इसका मतलब ऐसी सोच से है जिसमें कुछ लोगों को दूसरों से बेहतर माना जाता है. इससे समाज में भेदभाव बढ़ने का डर है.
अगर आप यह खबर पढ़कर सोच रहे हैं कि अब हर कोई अपने बच्चे को "परफेक्ट" बना सकता है, तो ऐसा सोचना सही नहीं होगा. यह तकनीक अभी नई है. इसके नतीजे पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं और इसे लेकर साइंटिस्ट के बीच काफी बहस चल रही है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि फिलहाल यह सुविधा भारत में उपलब्ध नहीं है.
आखिर में क्या समझना चाहिए?
पॉलिजेनिक स्क्रीनिंग एक नई और चर्चा में रहने वाली तकनीक जरूर है. लेकिन इसके जरिए "परफेक्ट बच्चा" चुनने के दावे को अभी पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता. इसे लेकर अभी और रिसर्च की जरूरत है और साफ नियम भी बनने जरूरी हैं. इसलिए जब तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी और पक्के नतीजे सामने नहीं आते, तब तक इसके दावों पर पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं होगा.
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