सिर्फ मां और बच्चों का बन रहा नया ट्रेवल ट्रेंड, जानें आप भी कैसे कर सकती हैं सेफ ट्रैवल?
मां छोटे बच्चों की जिम्मेदारी की वजह से अक्सर वे अकेले यात्रा पर जाने से कतराती है. ऐसे में मां और बच्चों का बना नया ट्रेवल ट्रेंड, जानें इसके बारे में....

आज के भागमभाग भरे जीवन में अक्सर ऐसा होता है कि पिता को अपने काम और व्यवसाय की वजह से परिवार के लिए ज्यादा समय नहीं दे पाते. ऐसे में मां चाहती है कि वो अपने बच्चों के साथ कुछ यादगार पल बिता सके, उनके साथ घूमने-फिरने जा सके. लेकिन सुरक्षा की चिंता और बच्चों की जिम्मेदारी उन्हें अकेले सफर पर जाने से रोकती है. ऐसे में मांओं के लिए यात्रा करने के जो नए मंच शुरू हुए हैं, वे मां और बच्चों को सुरक्षित और सहज तरीके से यात्राएं करने का अवसर दे रहे हैं. ये मंच मांओं को बिना किसी झंझट के अपने बच्चों के साथ बेफिक्र होकर यात्राएं करने सुविधा दे रहा है. यह वाकई में एक अच्छी पहल है. आइए जानते हैं इसके बारे में..
आपको करना है अकेले ट्रेवल तो जानें कैसे करें
छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने में कई परेशानियां होती है ऐसे में यह समूह ऐसी मांओं को जो अपने बच्चे के साथ ट्रेवल करना चाहती है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार उनके लिए बैकपैक विद मॉम (बीडब्ल्यूएम)और ट्रैवल विद किड्स - इंडिया (टीडब्ल्यूके) दो समूह है जो माताओं और बच्चों को साथ में यात्रा करने में मदद करते हैं. डॉ. निकिता माथुर और डॉ. साक्षी गुलाटी ने इन समूहों का स्थापना किया है. उनका कहना है कि “बहुत सी मां अकेले यात्रा करने के लिए उत्सुक रहती हैं...कभी-कभी आप पतियों को छोड़कर लड़कियों के साथ घूमना और मस्ती करना चाहती हैं लेकिन आप छोटे बच्चों को नहीं छोड़ सकते क्योंकि वे आप पर निर्भर होते हैं,” ऐसी मां जो ट्रेवल करना पसंद करती है. वह अपने जीवनसाथी के बिना ट्रेवल करना चाहती है तो वह इस संस्था से जुड़ सकती है. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में देश भर में 25 यात्राएं की हैं. हर बार लगभग 8 से 10 मां और उनके बच्चे शामिल होते है. आगे और भी ट्रेवल प्लान में है.
बच्चों को सीखने का नया अवसर मिलता है
इन यात्रा समूहों में शामिल होने का एक और फायदा यह है कि बच्चे एक-दूसरे से मिलकर नए रिश्ते बना पाते हैं और सीखने के नए अवसर प्राप्त कर पाते हैं. जब एक ही उम्र के कई बच्चे एक साथ यात्रा पर जाते हैं तो वे आपस में खेलते-कूदते हैं, बातचीत करते हैं और एक-दूसरे से सीखते हैं. यह उनके लिए नए दोस्त बनाने और सामाजिक कौशल सीखने का अच्छा अवसर होता है. इससे वे अधिक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी बनते हैं. इसीलिए माताएं भी चाहती हैं कि उनके बच्चे ऐसे यात्रा समूहों से जुड़ें और दूसरे बच्चों के साथ समय बिताएं.























