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National Coloring Book Day 2022: आज है किताबों को रंगने का दिन, इस दिन बच्चे जी भरकर रंगों से खेलते हैं
Special Day in August 2022: 2 अगस्त को हर साल राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस मनाया जाता है. इस दिन बच्चे पुस्तकों को और अपनी कॉपियों को जी भर कर रंगते हैं.

राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस
Book Coloring Day: बचपन में हम जब स्कूल जाते थे तो सबसे ज्यादा मजा खेलने और कलर करने में आता था. किताब को रंगना कितना मजेदार होता है न.. किताबों को रंगने का जो मजा होता है वो आप कहीं भी पा सकते हैं. आज राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस है. यह दिन ऐसा है कि आज पुस्तकों को विशेष रूप से रंगा जाता है. 2 अगस्त को हर साल राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस मनाया जाता है. इस दिन बच्चे अपनी बुक्स और कॉपीज़ को जी भर कर रंगते है. रंगों को महसूस करके बच्चे बहुत खुश होते हैं और उन कलाकृतियों को किताबों, पन्नों पर उकेरते हैं.
इस दिन आप बच्चों का एक ड्राइंग कंपटीशन रख सकते हैं जहां आप किताबों में अलग-अलग रंगों को लेकर चित्र बना सकते हैं. इसके अलावा दोस्तों के साथ मिलकर रंगों की दुनिया में कुछ वक्त के लिए डूब सकते हैं. रंग जिंदगी को और भी खुशनुमा बना देते हैं. ऐसे में आपाधापी और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच कुछ वक्त अपने किताबों और रंगों के लिए जरूर निकालिए.
वैज्ञानिकों का कहना
आज का समय मोबाइल का है. कोविड के बाद से तो मोबाइल का क्रेज और बढ़ा है. इसी में लगातार बच्चों को मोबाइल में बिजी रहने की आदत हो गई है, जिसके चलते हैं बाहरी एक्टिविटी से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में बच्चों को लेकर पेरेंट्स की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. इस चिंता को दूर करने के लिए आप अपने बच्चों को रंगों और किताबों से जुड़ सकते हैं. किताब और रंग तो ऐसी चीजें हैं जो बच्चे को आकर्षित करती हैं और उन्हें खुशी देती हैं. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अगर आपको आपके बच्चे में बदलाव लाना है तो पहले खुद में बदलाव लाना होगा. बच्चों के दोस्त बनना पड़ेगा. बच्चों के दोस्त बनकर ही आप बच्चों को रंगो से जोड़ सकते हैं.
राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस का इतिहास
रंगो की पुस्तक की शुरुआत सन् 1800 के उत्तरार्ध में मैकलॉघलिन ब्रदर्स द्वारा की गई थी जब उन्होंने पहली बार 'द लिटिल फोल्क्स पेंटिंग बुक' जारी की थी.. वे दोनों 1920 के दशक तक पुस्तकों का निर्माण करते रहें. नेशनल कलरिंग बुक डे बच्चें और बूढ़ो के बीच के अंतर को खत्म करता है. इस दिन का मजा तो युवा भी ले सकते हैं और अपने जीवन के एक दिन को बिना टेंशन के इंजाय कर सकते है. पुस्तकें दिव्यांग बच्चो के लिए तो बहुत हितकारी साबित होती है. वे रंगो की भाषा को बहुत अच्छे से समझते है ...
तो चलिए इस राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस को इन्हीं बच्चों के नाम करते है और उनके जीवन में रंग भरने की कोशिश करते है ....
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