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फोकस चाहिए या सुकून? जानिए कैसे म्यूजिक की आदत बना सकती है आपको असल शांति से दूर

वर्क के दौरान म्यूजिक सुनना कई बार फोकस बढ़ा सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इसकी आदत मानसिक थकान और साउंड सेंसिटिविटी जैसी समस्याएं भी ला सकती है. बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है.

आज के वर्क कल्चर में ईयरफोन या इयरपोड्स लगभग एक जरूरी हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस में घुसते ही बैग से लैपटॉप, पानी की बोतल, चार्जर के साथ-साथ सबसे पहले जो चीज निकाली जाती है वह होती है ईयरफोन. एक बार इन्हें कान में लगाया नहीं कि दुनिया की आवाज बंद और ध्यान पूरी तरह से कम पर. लेकिन क्या यह आदतें हमें वाकई फोकस करने में मदद करती है या धीरे-धीरे हमें असल सुकून और मानसिक शांति से दूर कर रही है. हाल ही में एक महिला को 8 घंटे लगातार इयरपोड्स पहनने के बाद हल्की सुनने की परेशानी का सामना करना पड़ा. इस घटना ने बहुत सारे लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हम जरूरत से ज्यादा म्यूजिक या ऑडियो पर निर्भर हो चुके हैं.

क्या म्यूजिक से बढ़ता है फोकस

अगर आपके आसपास का माहौल शोरगुल वाला है तो बैकग्राउंड में म्यूजिक दिमाग के लिए एक बफर की तरह काम कर सकता है. लेकिन अगर आप कोई ऐसा काम कर रहे हैं जिसमें पढ़ना या लिखना शामिल है और गाना लिरिक्स वाला है तो वह उल्टा असर डाल सकता है. इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक या एम्बिएंट साउंड ज्यादा फायदेमंद होती है.

कुछ लोग ब्राउन नॉइस भी सुनते हैं. यह एक धीमी लगातार चलने वाली साउंड होती है जिसमें कोई मेलोडी या भावना नहीं होती है. इसलिए यह दिमाग को बिना भटकाएं केंद्रित रहने में मदद करती है. यह खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है.

लेकिन यह आदत लत भी बन सकती है

अगर आपका दिमाग हमेशा ऑडियो के साथ ही फोकस करना सीख लेता है तो एक समय के बाद साइलेंस भी असहज लगने लगता है. यहीं आदत बाद में ध्यान भटकने और मानसिक थकान का कारण बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि हम खुद को बीच-बीच में म्यूजिक के बिना काम करने की भी आदत डालें.

डिवाइस से जुड़ी खामोश दिक्कतें

म्यूजिक सुनना जितना आरामदेह लगता है उतना ही ज्यादा समय तक ईयरफोन पहनना आपके कानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. ज्यादा समय तक ईयरबड्स लगाने से कानों में वैक्स अंदर की ओर धकेला जा सकता है. जिससे सूखापन, खुजली और यहां तक की संक्रमण और हल्की सुनने की कमी भी हो सकती है.

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि लगातार ईयर प्लग या इयरफोन के जरिए बाहरी ध्वनि को रोकना आपके दिमाग को नेचुरल आवाजों को समझने में कमजोर बना देता है. इसका असर यह होता है कि असल दुनिया की हल्की आवाज ही भी चुभने लगती है. जिससे चिड़चिड़ापन या साउंड सेंसिटिविटी बढ़ जाती है.

कितना सुनना है ज्यादा

इयरफोन लगाकर म्यूजिक कितना सुनना सही होता है इसका कोई तय समय नहीं है. लेकिन विशेषज्ञ 60-60 रूल अपनाने की सलाह देते हैं. एक बार में 60 मिनट से ज्यादा न सुनें और वॉल्यूम 60 प्रतिशत से ऊपर न रखें.

कुछ जरूरी ईयरफोन एटिकेट्स भी रखें याद

आपको काम करते वक्त ईयरफोन और इयरपोड्स लगाकर म्यूजिक सुनते समय कुछ जरूरी एटिकेट्स भी याद रखने चाहिए. जैसे हर 30 से 60 मिनट में 5 से 10 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए. इसके अलावा इयरपोड्स को साफ और हाइजेनिक रखना चाहिए. वहीं ईयरबर्ड्स को कानों में बहुत ज्यादा अंदर तक नहीं डालना चाहिए. कभी-कभी बिना म्यूजिक के भी काम कर लेना चाहिए और वॉल्यूम को हमेशा सीमित रखना चाहिए.

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