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International Nurses Day: फ्लोरेंस नाइटेंगल कौन थीं, जिनकी याद में दुनिया मनाती है अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस?

कोरोना महामारी के दौरान हम सभी ने देखा कि जब दवा काम नहीं कर रही थी, तब सिर्फ सेवा ही काम कर रही थी. उस दौरान नर्सों ने लाखों लोगों की जान बचाई थी. अपनी जान की परवाह किए बगैर मरीजों का इलाज किया था.

International Nurses Day: पूरी दुनिया में 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है. नर्सेस के योगदान को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए हर साल 'इंटरनेशनल नर्सेस डे' मनाया जाता है. किसी मरीज को ठीक करने में जितना योगदान एक डॉक्टर का होता है, उतना ही योगदान नर्स का भी होता है. मरीजों को वक्त पर दवाई देने से लेकर दिन-रात उनका ध्यान रखने तक नर्सेस भी बीमार लोगों को जीवन दान देने में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं. मेडिकल सेक्टर में नर्सेस की अपनी एक अलग ही अहमियत है.

नर्सेस की खास अहमियत के चलते हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है. एबीपी न्यूज ने जोधपुर एम्स के प्रोफेसर प्रिंसिपल सुरेश कुमार शर्मा से बातचीत कर जाना कि नर्सिंग डे आखिर क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई?

कब और कैसे हुई थी शुरुआत?

12 मई 1820 को मशहूर नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म हुआ था. उन्हीं की याद में हर साल 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है. नाइटिंगेल नर्स होने के साथ-साथ एक समाज सुधारक भी थीं. क्रीमिया युद्ध के दौरान उन्होंने जिस तरह से काम किया था, उसकी सराहना आज तक होती थी. नाइटिंगेल 'द लेडी विद द लैंप' के नाम से भी जानी जाती हैं. क्योंकि वो रात के अंधेरे में लैंप लेकर घायल सैनिकों का इलाज करने के लिए निकलती थीं. युद्ध के दौरान घायल सैनिकों में इन्फेक्शन बढ़ रहा था, जिससे सैनिकों की मौत हो रही थी. उनके इलाज से हजारों की तादाद में सैनिक फिर से ठीक होने लगे थे. अपने इस सराहनीय काम से फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने 'नर्सिंग' को महिलाओं के लिए एक नया पेशा बना दिया था. 

'आवर नर्सेस आवर फ्यूचर' थीम

इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स (ICN) हर साल इस खास दिन के लिए कोई न कोई थीम रखती है. ऐसे में इस साल यानी 2023 की थीम 'आवर नर्सेस आवर फ्यूचर' (Our Nurses, Our Future) रखी गई है, जिसका मतलब है कि 'हमारी नर्सेस हमारा भविष्य' हैं. कोरोना महामारी के दौरान हम सभी ने यह देखा है कि जब दवा काम नहीं कर रही थी, तब सिर्फ सेवा ही काम कर रही थी. उस दौरान नर्सों ने लाखों लोगों की जान बचाई थी. अपनी जान की परवाह किए बगैर मरीजों का इलाज किया था. 

देश में खोले जाएंगे 157 नर्सिंग कॉलेज

जोधपुर एम्स के नर्सिंग विभाग के प्रिंसिपल सुरेश कुमार शर्मा बताया कि पूरी दुनिया में लोग डॉक्टर बन रहे हैं. इंजीनियर बन रहे हैं. बिजनेसमैन बन रहे हैं. लेकिन नर्स बनना कोई नही चाहता है. कोरोना महामारी के बाद पूरी दुनिया मे नर्स की मांग तेजी से बढ़ी है. दुनिया को इस समय एक करोड़ तीस लाख नर्स की जरूरत है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि देश में 157 नर्सिंग कॉलेज खोले जा रहे हैं, ताकि भारत को बड़ी संख्या में योग्य नर्सेस मिल सकें.

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