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सावन में क्यों नहीं खानी चाहिए कड़ी? आयुर्वेद में लिखी यह बात पढ़ ली तो लगेगा डर

दिल्ली की आयुर्वेदाचार्य डॉ. रीना शर्मा ने बताया कि मॉनसून में डाइजेशन स्लो हो जाता है. ऐसे में हैवी और ऑयली फूड्स से बचना चाहिए. कढ़ी में दही और बेसन होता है, जो इस मौसम में मुश्किल से पचता है.

मॉनसून का मौसम आते ही बारिश की फुहारें और ठंडी हवाएं मन को सुकून देती हैं, लेकिन इस मौसम में डाइट का खास ख्याल रखना पड़ता है. आयुर्वेद के मुताबिक, सावन के महीने में कुछ फूड्स से परहेज करना चाहिए, जिनमें कढ़ी जैसी डिश भी शामिल हैं. आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कढ़ी खाने से डाइजेशन सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है और हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं कि सावन में कढ़ी क्यों नहीं खानी चाहिए? 

मॉनसून में डाइट का ध्यान रखना क्यों जरूरी?

आयुर्वेद में मॉनसून को वर्षा ऋतु कहते हैं. इस दौरान बॉडी का डाइजेस्टिव फायर कमजोर हो जाता है. वहीं, इस मौसम में ह्यूमिडिटी और नमी की वजह से बैक्टीरिया और इंफेक्शंस का खतरा बढ़ जाता है. दिल्ली की आयुर्वेदाचार्य डॉ. रीना शर्मा ने बताया कि मॉनसून में डाइजेशन स्लो हो जाता है. ऐसे में हैवी और ऑयली फूड्स से बचना चाहिए. कढ़ी में दही और बेसन होता है, जो इस मौसम में मुश्किल से पचता है.

सावन में क्यों नहीं खाएं कढ़ी?

आयुर्वेद के अनुसार, कढ़ी दही, बेसन, और मसालों से बनती है. यह सावन और मॉनसून के सीजन में नुकसानदायक हो सकती है. आइए इसके पीछे के कारणों के बारे में जानते हैं.

मॉनसून में कफ बढ़ाता है दही

कढ़ी का मेन इंग्रेडिएंट दही (curd) होता है, जो आयुर्वेद में कूलिंग फूड माना जाता है. हालांकि, मॉनसून में नमी की वजह से बॉडी में कफ दोष बढ़ जाता है. दही इस कफ को और बढ़ा सकता है, जिससे कोल्ड, कफ, और साइनस जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. बेंगलुरु के आयुर्वेदाचार्य डॉ. अनिल मंगल के मुताबिक, मॉनसून में दही बेस्ड फूड्स जैसे कढ़ी को अवॉइड करें, क्योंकि ये पाचन को स्लो कर सकते हैं और कफ बढ़ा सकते हैं.

डाइजेशन स्लो करता है बेसन

कढ़ी में बेसन (gram flour) यूज होता है, जो पचने में हैवी होता है. मॉनसून में डाइजेस्टिव सिस्टम पहले से कमजोर होता है और बेसन इस पर और दबाव बढ़ाता है. इससे गैस, ब्लोटिंग और पेट में भारीपन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. हल्के और गर्म फूड्स जैसे सूप या खिचड़ी मॉनसून में बेस्ट हैं. ऐसे में बेसन से बनी चीजें अवॉइड करना चाहिए.

मसाले और तेल बढ़ाते हैं पित्त दोष

कढ़ी में तड़का लगाने के लिए तेल और मसालों जैसे हींग, जीरा, राई का इस्तेमाल होता है. आयुर्वेद के मुताबिक, ज्यादा मसाले और तेल पित्त दोष को बढ़ा सकते हैं, जिससे एसिडिटी, हार्टबर्न और स्किन प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. यही वजह है कि सावन के महीने में हल्के मसाले और कम तेल वाले फूड्स खाएं.

नमी में बैक्टीरिया का खतरा

मॉनसून में ह्यूमिडिटी की वजह से दही में बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनप सकते हैं. अगर कढ़ी को सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो यह दिक्कत बढ़ सकती है. ये बैक्टीरिया फूड पॉइजनिंग या इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं. 

डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है एक्स्ट्रा लोड

कढ़ी एक हैवी डिश है, क्योंकि इसमें दही, बेसन और तेल का कॉम्बिनेशन होता है. मॉनसून में डाइजेस्टिव सिस्टम पहले से कमजोर होता है और कढ़ी खाने से पेट में भारीपन, गैस या डायरिया जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

ये भी पढ़ें: कैसे खत्म हो जाती है घुटनों की ग्रीस? जानें इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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