European vs Indian Liver Health: शराब पीने वाले विदेशी का लिवर हेल्दी, न पीने वाले भारतीय को 'फैटी लिवर'! क्या है इसकी वजह?
Does Alcohol Always Cause Fatty Liver: विदेश में लोग खूब शराब पीते हैं, लेकिन उनका लिवर हेल्दी रहता है. भारत में जो लोग शराब नहीं पीते, उनको भी लिवर की दिक्कत होने लगती है. चलिए बताते हैं क्यों?

Why Europeans Tolerate Alcohol Better Than Indians: इंसानों और शराब के बीच का रिश्ता हमेशा सीधा-सादा नहीं रहा है. इसमें संस्कृति, सामाजिक आदतें और शरीर की बनावट, तीनों की भूमिका होती है. हम में से कई लोग सीमित मात्रा में शराब का सेवन करते हैं, लेकिन देश में बड़ी आबादी फैटी लिवर की समस्या से जूझ रही है. अक्सर यह सवाल उठता है कि यूरोपीय लोग हमसे ज्यादा शराब पीते हैं, फिर भी उन्हें इससे उनको दिक्कत कम क्यों होती है? इसी विषय पर डॉक्टर हर्ष व्यास ने एक दिलचस्प जानकारी शेयर की है.
सोशल मीडिया पर शेयर किया जानकारी
इंस्टाग्राम पर शेय एक वीडियो में उन्होंने 37 साल के एक इटालियन और 37 साल के एक भारतीय व्यक्ति की लिवर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की तुलना दिखाई, हैरानी की बात यह थी कि जो यूरोपीय व्यक्ति हफ्ते में दो-तीन बार शराब पीता था, उसका लिवर ज्यादा स्वस्थ दिखा, जबकि भारतीय व्यक्ति शराब नहीं पीता था, फिर भी उसके लिवर में फैटी बदलाव नजर आए, डॉ. व्यास के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे पहला कारण जेनेटिक्स है, उन्होंने बताया कि यूरोपीय लोगों में शराब को तोड़ने वाले एंजाइम, अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज और एल्डिहाइड डिहाइड्रोजनेज की सक्रियता बेहतर होती है. इसका मतलब यह है कि शराब से बनने वाले जहरीले तत्व उनके शरीर से जल्दी बाहर निकल जाते हैं. जबकि एशियाई आबादी में ये एंजाइम उतने प्रभावी नहीं होते, जिससे ये हानिकारक तत्व शरीर में ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं और धीरे-धीरे बाहर निकलते हैं.
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लाइफस्टाइल का भी अहम रोल
दूसरा बड़ा कारण खानपान है. यूरोपियन डाइट में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, मछली और सी-फूड के रूप में हेल्दी फैट, ऑलिव ऑयल और पर्याप्त प्रोटीन शामिल होता है. यानी उनका भोजन संतुलित और पोषण से भरपूर होता है. इसके मुकाबले भारतीय आहार में अक्सर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जबकि हेल्दी फैट और प्रोटीन अपेक्षाकृत कम होते हैं. यह अंतर लिवर की सेहत पर असर डाल सकता है. तीसरा अहम पहलू है फिजिकल एक्टिविटी. डॉक्टर ने बताया कि उनके इटालियन मरीज रोज 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलता था और इसके अलावा 30 से 40 मिनट एक्सरसाइज भी करता था. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग रेगुलर एक्सरसाइज नहीं कर पाते और रोज 5 किलोमीटर चलना भी मुश्किल हो जाता है.
डॉ. व्यास का कहना है कि भले ही यूरोपीय लोग शराब पीते हों, लेकिन उनकी लाइफस्टाइल संतुलित और सक्रिय होती है. बेहतर डाइट, नियमित व्यायाम और अनुकूल जेनेटिक कारक मिलकर शरीर को हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद करते हैं. जबकि यदि लाइफस्टाइल असंतुलित हो, तो बिना शराब के भी लिवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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