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हेयर ट्रांसप्लांट से पहले ये वाला टेस्ट होता है जरूरी, नहीं तो जा सकती है जान

ट्रांसप्लांट प्रोसेस से पहले हेल्थ एक्सपर्ट्स कई तरह की जांच कराते हैं. इनमें ब्लड से लेकर बीमारी से संबं​धित अन्य तरह की जांच भी होती हैं. ऐसे ही हेयर ट्रांसप्लांट से पहले भी कुछ जांच जरूरी होती हैं.

बाल झड़ना एक आम समस्या है. पहले हेयर फाॅल को उम्र से जोड़कर देखा जाता था. लेकिन अब बड़ों से लेकर युवाओं तक में ये दिक्कत देखने को मिल जाती है. ऐसे में गंजा सिर लुक को खराब कर देता है. इससे छुटकारा पाने के लिए लोग हेयर ट्रांसप्लांट का सहारा लेते हैं. इससे सिर पर पहले की तरह बाल नजर आने लगते हैं. हेयर ट्रांसप्लांट के दाैरान एक टेस्ट जरूरी होता. जिसकी रिपोर्ट के बाद ही एक्टसपर्ट्स ट्रांसप्लांट प्रोसेस पर आगे बढ़ते हैं. आ​खिर ये टेस्ट क्या है और किस तरह ट्रांसप्लांट होता है, आइए जानते हैं...

ये टेस्ट होता है खास

ट्रांसप्लांट प्रोसेस से पहले हेल्थ एक्सपर्ट्स कई तरह की जांच कराते हैं. इनमें ब्लड से लेकर बीमारी से संबं​धित अन्य तरह की जांच भी होती हैं. ऐसे ही हेयर ट्रांसप्लांट से पहले भी कुछ जांच जरूरी होती हैं. इनमें से एक प्रमुख होता है एलोपेसिया टेस्ट. हेयर ट्रांसप्लांट करने से पहले एक्सपर्ट्स एलोपेसिया टेस्ट जरूर कराते हैं. इस टेस्ट के जरिए मरीज के हेयर फाॅल का कारण जाना जाता है. इस टेस्ट में फिजिकल एक्जामिनेशन, ब्लड टेस्ट, स्कैलप बायोप्सी व हेयर पुल टेस्ट किया जाता है. इसके जरिए पता लगाया जाता है कि बालों के झड़ने के पीछे क्या कारण जिम्मेदार हैं. हेयर ट्रांसप्लांट की काैन सी तकनीक इस दाैरान प्रभावी होगी. इसलिए ये टेस्ट हेयर ट्रांसप्लांट से पहले जरूरी होता है.

दो तरह से होता है हेयर ट्रांसप्लांट

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हेयर ट्रांसप्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है. इसमें व्यक्ति की खोपड़ी या अन्य हिस्सों से हेयर फॉलिकल्स निकालकर गंजेपन वाली जगह पर लगा दिए जाते हैं. आमतौर पर यह काम दो तरीके से किया जाता है. पहली प्रक्रिया फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (एफयूई) है और दूसरी प्रक्रिया फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांट (एफयूटी) होती है. एफयूटी मेथड को स्ट्रिप मेथड भी कहा जाता है. इन दोनों तकनीक में हेयर फॉलिकल्स को निकालने का तरीका अलग है, लेकिन ट्रांसप्लांट करने का तरीका सेम है. दोनों ही तकनीक सेफ मानी जाती हैं.

फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन: फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन एक एडवांस टेक्निक है. इसमें डोनर एरिया से रेंडमली हेयर फॉलिकल्स निकाले जाते हैं. इसके बाद इन्हें गंजेपन वाली जगह पर ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है. हेयर ट्रांसप्लांट की ये एडवांस तकनीक तेजी से पाॅपुलर हुई है.

फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांट:  फॉलिक्युलर यूनिट ट्रांसप्लांट एक परंपरागत तरीका है. इसमें डोनर एरिया से करीब आधा इंच चौड़ी और 10-15 सेंटीमीटर लंबी हेयर फॉलिकल्स की स्ट्रिप निकाली जाती है, जिसमें काफी फॉलिकल्स होते हैं. इस स्ट्रिप से हेयर फॉलिकल्स को निकालकर गंजेपन वाली जगह पर लगा दिया जाता है.

हेयर ट्रांसप्लांट के दाैरान न करें ये गलती

हेयर ट्रांसप्लांट के लिए एक अच्छे क्वालिफाई डाॅक्टर का सिलेक्शन करना चाहिए. क्योंकि पूर्व में हेयर ट्रांसप्लांट से माैत होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें अनक्वालिफाई हेल्थ प्रोफेशनल की वजह से केस बिगड़ गए थे.

ये भी पढ़ें: हर घंटे 100 लोगों की जान ले रहा अकेलापन, जानें यह बीमारी कितनी खतरनाक और लोगों को कैसे बनाती है अपना शिकार?

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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