ये 5 सिग्नल नजर आएं तो समझ लें ब्रेस्ट में कैंसर ने बना लिया घर, इन तरीकों से ही बच पाएगी जान
जेनेटिक म्यूटेशन बाॅडी में ब्रेस्ट कैंसर की एक प्रमुख वजह है. इसमें बाॅडी में पाए जाने वाले बीआरसीए 1 और बीआरसीए 2 जीन्स में बदलाव देखने को मिलता है. ये जीन्स सामान्य ताैर पर कैंसर से बचाव करते हैं.

दुनियाभर में सामने आ रहे कैंसर के केसेज में से ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख है. ये तेजी से महिलाओं को चपेट में ले रहा है. ब्रेस्ट में ट्यूमर बन जाता है, जो समय से डाग्नोज और ट्रीटमेंट नहीं होने के चलती शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है. ये स्थिति जानलेवा हो सकती है. अगर शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का पता लगा लिया जाए तो पूरी तरह इसका इलाज संभव है. कुछ ऐसे कारण हैं, जो इस कैंसर के बाॅडी में डेवलप होने का रिस्क बढ़ाते हैं. आइए उनके बारे में जानते हैं...
पीढ़ी दर पीढ़ी दाैड़ता है ये जीन
जेनेटिक म्यूटेशन बाॅडी में ब्रेस्ट कैंसर की एक प्रमुख वजह है. इसमें बाॅडी में पाए जाने वाले बीआरसीए 1 और बीआरसीए 2 जीन्स में बदलाव देखने को मिलता है. ये जीन्स सामान्य ताैर पर कैंसर से बचाव करते हैं. लेकिन जब ये म्यूटेट होते हैं तो रिस्क बढ़ा देते हैं. बीआरसीए-1 जहां 72 परसेंट तो वहीं बीआरसीए-2 69 परसेंट तक ब्रेस्ट कैंसर डेवलप होने का रिस्क बढ़ा सकता है. इस म्यूटेशन के चलते युवा अवस्था में कैंसर होने का खतरा रहता है. क्योंकि ये जीन्स फैमिली में रन करता है. फैमिली में किसी को ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर होने पर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. इस रिस्क को कम करने के लिए जेनेटिक टेस्टिंग की सलाह दी जाती है.
लाइफस्टाइल की वजह से बढ़ता है खतरा
लाइफस्टाइल कई हेल्थ इश्यूज की वजह बनता है. लेकिन ये ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी बढ़ाता है. अधिक वजन और मोटापा से बाॅडी में फैट टिश्यू अधिक एस्ट्रोजन हार्मोन बनाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बन सकता है. 40 से 49 की उम्र में महिलाओं में ये दिक्कत प्रमुख रूप से देखने को मिलती है. साथ ही स्मोकिंग एक और बढ़ा रिस्क है. ब्रेस्ट के सेल डैमेज होने लगते हैं, इससे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है.
हार्मोनल एंड रिर्पोडक्टिव फैक्टर
हार्मोन्स में बदलाव कई दिक्कतों का कारण बनता है. ये कैंसर के रिस्क को भी बढ़ाता है. मासिक धर्म जल्दी आना, देर से मेनोपाॅज या लंबे समय तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेने से बाॅडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो ब्रेस्क कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं. जल्दी बच्चे होना और ब्रेस्ट फीडिंग की प्रक्रिया इस रिस्क को कम करती है. वहीं हार्मोनल गर्भनिरोधक भी रिस्क को बढ़ा सकते हैं.
डायबिटीज भी होती है ट्रिगर
हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के अनुसार ऐसी महिलाएं जो डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस की शिकार हैं, उनमें मेनोपाॅज के बाद ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है. बाॅडी में मोटापा और खराब मेटाबाॅलिज्म से बाॅडी में हार्मोन संतुलन बिगड़ता है, जो कैंसर का रिस्क बढ़ाता है.
आसपास के माहौल का असर
हमारे आसपास का वातावरण भी ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को बढ़ाता है. आयोनाइजिंग रेडिशन, चेस्ट रेडियोथेरेपी से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है. साथ ही प्लास्टिक और काॅस्मेटिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल से शरीर में हार्मोन बैलेंस बिगड़ता है, जिससे ब्रेस्ट का खतरा पैदा हो सकता है.
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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Source: IOCL





















