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3D Atlas Human Brainstem: IIT मद्रास ने जारी किया इंसानी ब्रेनस्टेम का 3D एटलस, मेडिकल साइंस के लिए कितना खास?

3D Atlas Human Brainstem : विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज फ्यूचर पार्किंसन, अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज और रिसर्च में नई संभावनाएं खोल सकती है.

3D Atlas Human Brainstem : IIT मद्रास ने इंसानी दिमाग के ब्रेनस्टेम का एक खास 3D एटलस तैयार किया है, जिसकी मदद से वैज्ञानिक दिमाग के सबसे मुश्किल हिस्से को पहले से ज्यादा आसानी और गहराई से समझ सकेंगे. इस खास एटलस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ब्रेनस्टेम को सेल स्तर तक देखा जा सकता है यानी वैज्ञानिक अब यह जान पाएंगे कि दिमाग के इस हिस्से में कौन-से सेल्स कहां मौजूद हैं और उनका आपस में क्या संबंध है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज फ्यूचर पार्किंसन, अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज और रिसर्च में नई संभावनाएं खोल सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि IIT मद्रास ने जारी किया इंसानी ब्रेनस्टेम का 3D एटलस कितना खास है. 

क्या है ब्रेनस्टेम और क्यों है इतना जरूरी?

ब्रेनस्टेम दिमाग का वह हिस्सा होता है, जो दिमाग को रीढ़ की हड्डी से जोड़ता है. यह शरीर के कई जरूरी कामों को कंट्रोल करता है, जिनमें सांस लेना, दिल की धड़कन को कंट्रोल करना, ब्लड प्रेशर बनाए रखना, निगलने की प्रक्रिया और नींद-जागने का सर्कल शामिल है. अगर ब्रेनस्टेम में किसी तरह की चोट या गड़बड़ी हो जाए, तो इसका असर शरीर की कई जरूरी एक्टिवीटी पर पड़ सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से इस हिस्से को गहराई से समझने की कोशिश कर रहे थे. 

क्या है ANCHOR 3D एटलस?

IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (SGBC) के तैयार किए गए इस एटलस का नाम ANCHOR रखा गया है. इसका पूरा नाम Atlas of Neurochemical Characterization of the Human Brainstem with 3D Reconstruction है. यह इंसानी ब्रेनस्टेम का एक डिजिटल 3D नक्शा है, जिसे मॉर्डन तकनीकों की मदद से तैयार किया गया है. इसकी मदद से वैज्ञानिक ब्रेनस्टेम के स्ट्रक्चर को अलग-अलग कोणों से देख सकते हैं और उसकी सूक्ष्म बनावट को समझ सकते हैं. 

किन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया?

इस 3D एटलस को तैयार करने के लिए कई तकनीकों का यूज किया गया है. इसमें MRI स्कैनिंग, हिस्टोलॉजी, न्यूरोकेमिकल मैपिंग और 3D रिकंस्ट्रक्शन तकनीक को एक साथ जोड़ा गया. इन सभी तकनीकों की मदद से वैज्ञानिकों ने इंसानी ब्रेनस्टेम का बेहद बड़ा और सटीक एटलस तैयार किया. इस एटलस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सेल्स स्तर की जानकारी उपलब्ध कराता है. शोधकर्ताओं ने सैकड़ों सीरियल सेक्शनों का विश्लेषण करके ब्रेनस्टेम की 200 से ज्यादा संरचनाओं यानी न्यूक्लियाई और फाइबर ट्रैक्ट्स को 3D रूप में तैयार किया है. साथ ही 500 से ज्यादा सेक्शनों पर आठ अलग-अलग इम्यूनोस्टेन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे अलग-अलग प्रकार की न्यूरोकेमिकल सेल्स की पहचान की जा सकी. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दिमाग की कौन-सी कोशिकाएं कौन-सा काम करती हैं और बीमारियों के दौरान उनमें क्या बदलाव आते हैं. 

कौन-कौन सा डेट शामिल किया गया है?

ANCHOR एटलस में इंसानी जीवन के अलग-अलग चरणों को शामिल किया गया है. इसमें प्रेगनेंसी के दौरान विकसित हो रहा दिमाग,बचपन का ब्रेनस्टेम और एडल्ट्स अवस्था का ब्रेनस्टेम शामिल है. इससे वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि उम्र बढ़ने के साथ दिमाग के इस हिस्से में किस तरह के बदलाव आते हैं. 

दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए खुला होगा एटलस

IIT मद्रास ने इस 3D एटलस को केवल अपने संस्थान तक सीमित नहीं रखा है. इसे एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है, जिससे दुनियाभर के वैज्ञानिक, डॉक्टर और शोधकर्ता इसका यूज कर सकें.इससे न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. 

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BRICS Neuroscience Symposium में हुआ लॉन्च

इस एटलस का अनावरण IIT मद्रास में आयोजित तीसरे BRICS Neuroscience Symposium 2026 के दौरान किया गया. इस मौके पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने कहा कि यह एटलस ब्रेनस्टेम से जुड़ी चोटों और बीमारियों से प्रभावित सेल्स की पहचान करने में मदद कर सकता है. फ्यूचर में इसका इस्तेमाल क्लीनिकल रिसर्च और मरीजों के बेहतर इलाज में भी किया जा सकता है.

न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में खुल सकते हैं नए रास्ते

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एटलस न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो सकता है. इसकी मदद से वैज्ञानिक पार्किंसन, अल्जाइमर, ब्रेनस्टेम डिजीज और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे. इसके अलावा, यह नई दवाओं के विकास और ज्यादा सटीक ट्रीटमेंट तैयार करने में भी जरूरी रोल निभा सकता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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