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Heatwave And Nervous System: आपके नर्वस सिस्टम के लिए क्यों खतरनाक हैं आने वाली गर्मियां, जानें किन बीमारियों का खतरा?

Dizziness And Headache In Heat: गर्मी के मौसम में हमारे शरीर पर तमाम तरह के असर पड़ने लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आपके नर्वस सिस्टम के लिए क्यों खतरनाक हैं आने वाली गर्मियां.

How Extreme Heat Affects The Nervous System: भारतीय गर्मियों में बाहर निकलते ही फर्क साफ महसूस होने लगता है. यह सिर्फ गर्मी नहीं होती, बल्कि एक तरह का भारीपन होता है, जो शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी असर डालता है. धीरे-धीरे थकान बढ़ती है, ध्यान भटकने लगता है और कई बार स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर हो जाती है. हम अक्सर डिहाइड्रेशन, सनबर्न या थकावट की बात करते हैं, लेकिन असल में गर्मी का सीधा असर दिमाग पर भी पड़ता है. तेज गर्मी में सिरदर्द, चक्कर आना, कन्फ्यूजन और ध्यान लगाने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

TOI Health से बातचीत में चेन्नई के कावेरी हॉस्पिटल की सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभा सुब्रमणियन बताती हैं कि गर्मियों में ज्यादा गर्मी और उमस के कारण शरीर में पानी और सोडियम की कमी हो जाती है, जिससे दौरे तक पड़ सकते हैं. ज्यादा पसीना आने से सोडियम लेवल गिर जाता है और यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है. कई मामलों में हीट स्ट्रोक भी हो सकता है, जिससे बेहोशी और सीजर का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में खासकर जिन लोगों को पहले से दौरे की समस्या है, उन्हें खुद को हाइड्रेट रखना चाहिए और हल्के, ढीले व हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए.

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किन लोगों को होता है असर?

बच्चे, बुजुर्ग और जिन लोगों को पहले से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हैं, वे ज्यादा जोखिम में रहते हैं. इसके अलावा, जो लोग लंबे समय तक बाहर काम करते हैं, जैसे डिलीवरी वर्कर्स, ट्रैफिक पुलिस या रेहड़ी-पटरी वाले, उनके लिए यह समस्या रोज की बन जाती है. वहीं, घर के अंदर भी हमेशा सुरक्षित माहौल नहीं होता. खराब वेंटिलेशन, बिजली कटौती या कूलिंग की कमी से स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे दिमाग का संतुलन प्रभावित होता है.

किन बीमारियों का बढ़ता है खतरा?

डॉ. शुभा सुब्रमणियन के मुताबिक, गर्मी का असर कई ऐसी बीमारियों पर भी पड़ता है, जिनके बारे में हम ज्यादा बात नहीं करते. जैसे बच्चों में ड्रावेट सिंड्रोम जैसी एपिलेप्सी की स्थिति गर्मी में और खराब हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी से याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन फॉग और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोगों में लक्षण बढ़ सकते हैं, जबकि डिहाइड्रेशन के कारण स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है.

पार्किंसन और अल्जाइमर के मरीजों के लिए भी गर्मी खतरनाक हो सकती है, क्योंकि उनके शरीर की तापमान कंट्रोल करने की क्षमता कमजोर होती है. वहीं, माइग्रेन से पीड़ित लोगों में धूप में निकलना सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है. गर्मी थकान को भी बढ़ाती है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और मुश्किल हो जाती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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