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How Dialysis Machine Works: कैसे काम करती है डायलिसिस मशीन, यह कैसे करती है किडनी की मदद?

Blood Pump in Dialysis Machine: बहुत लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि आखिर डायलिसिस मशीन काम कैसे करती है और इससे किडनी को क्या मदद मिलती है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में.

How Does a Dialysis Machine Help Kidneys: डायलिसिस कराने वाले मरीज इस प्रक्रिया की रूटीन से अच्छी तरह परिचित होते हैं. क्लिनिक पहुंचना, वजन मापना, तापमान और ब्लड प्रेशर चेक कराना, सुई लगना यदि कैथेटर न हो, फिर ट्यूबों को डायलाइजर से जोड़ना और कुछ घंटों तक कुर्सी पर बैठना,, यह सब उनकी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. लेकिन इंतज़ार के उन घंटों में क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर यह डायलिसिस मशीन काम कैसे करती है और किडनी की मदद कैसे करती है?. चलिए आपको बताते हैं विस्तार से. 

कैसे काम करती है मशीन

सबसे पहले समझते हैं कि मशीन करती क्या है. किडनी हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली davita के अनुसार, डायलिसिस मशीन एक लिक्विड तरल तैयार करती है जिसे डायलिसेट कहा जाता है. यही तरल आपके खून से गंदगी और अतिरिक्त अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स का संतुलन भी बनाए रखने में सहायक होता है. इलाज के दौरान मशीन लगातार आपके शरीर से बाहर बह रहे खून के फ्लो पर नजर रखती है. कभी-कभी जो अलार्म बजता है, वह इसी निगरानी प्रणाली का हिस्सा है,ताकि स्टाफ को पता चल सके कि कुछ जांचने की जरूरत है.

मशीन के पास रखे प्लास्टिक के कनस्तर दरअसल डायलिसेट बनाने के लिए जरूरी घोल रखते हैं. इनमें एक एसिडिक घोल जिसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स होते हैं, बाइकार्बोनेट जो बेकिंग सोडा जैसा होता है और शुद्ध पानी शामिल होते हैं. मशीन इन सभी को मिलाकर सही अनुपात में डायलिसेट तैयार करती है. इलाज के दौरान आपका खून और डायलिसेट डायलाइजर के अंदर एक साथ बहते हैं, लेकिन वे सीधे संपर्क में नहीं आते. खून से गंदगी छनकर डायलिसेट में चली जाती है और बाद में वह तरल नाली में बहा दिया जाता है.

खून शरीर से बाहर और वापस अंदर कैसे जाता है?

 इसके लिए विशेष ब्लड ट्यूबिंग होती है, जो आपके एक्सेस से खून को डायलाइजर तक ले जाती है. यह ट्यूब एक ब्लड पंप से होकर गुजरती है, जो गोल घुमाव में चलता है. यही पंप खून को आगे बढ़ाता है और फिल्टर होने के बाद वापस शरीर में भेज देता है. इलाज के दौरान खून के थक्के न बनें, इसके लिए हेपेरिन नामक दवा दी जाती है. डॉक्टर हर मरीज के लिए इसकी मात्रा तय करते हैं. यह दवा सिरिंज के जरिए मशीन में लगे हेपेरिन पंप से धीरे-धीरे खून की ट्यूब में जाती रहती है, ताकि खून जमने न पाए.

सुरक्षा के लिए होते हैं एयर ट्रैप 

सुरक्षा के लिए मशीन में एयर ट्रैप लगे होते हैं, जो खून की ट्यूब में हवा जाने से रोकते हैं. अगर हवा का बुलबुला अंदर चला भी जाए, तो सेंसर तुरंत पंप बंद कर देता है और अलार्म बज उठता है. तब तक ब्लड फ्लो को रोका जाता है जब तक समस्या दूर न हो जाए. मशीन लगातार ब्लड के दबाव, प्रवाह, तापमान और डायलिसेट के मिश्रण की जांच करती रहती है. किसी भी गड़बड़ी पर अलार्म बजता है और जरूरत पड़ने पर ब्लड या लिक्किड का प्रवाह रोक दिया जाता है. यही वजह है कि इलाज के दौरान कई बार अलग-अलग अलार्म सुनाई देते हैं, ये आपकी सुरक्षा के लिए होते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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