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Ebola Outbreak in Congo : कांगो में इबोला से 2000 मौतें, तेजी से फैल रहा वायरस

Ebola Outbreak in Congo : अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और अब इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा 2 हजार के पार पहुंच गया है.

Ebola Outbreak in Congo : दुनिया में इबोला के प्रकोप को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और अब इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा 2 हजार के पार पहुंच गया है. सबसे चिंता की बात यह है कि इस बार इबोला का प्रकोप रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 4,381 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,011 लोगों की मौत हो गई है. वहीं, 704 मरीज अभी अस्पतालों में भर्ती हैं और उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है.

तीन हफ्तों में 1000 से 2000 हुई मौतें

रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण से मौतों का आंकड़ा 1,000 तक पहुंचने में करीब 9 हफ्ते लगे थे. लेकिन इसके बाद अगले 1,000 मौतों का आंकड़ा सिर्फ करीब 3 हफ्तों में पार हो गया. इसी तेजी की वजह से इसे अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला इबोला प्रकोप बताया जा रहा है.

Bundibugyo स्ट्रेन क्यों बढ़ा रहा चिंता?

इस प्रकोप में Bundibugyo प्रजाति का इबोला वायरस सामने आया है. WHO के मुताबिक, इस वायरस के लिए अभी कोई वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है. हालांकि कुछ वैक्सीन और इलाज के ऑप्शनों को लेकर रिसर्च जारी है. वहीं स्वास्थ्य अधिकारी वायरस की निगरानी, मरीजों को आइसोलेट करने, संपर्क में आए लोगों की पहचान, क्लीनिकल केयर और स्थानीय लोगों के सहयोग के जरिए संक्रमण को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं.

मई में हुई थी आधिकारिक घोषणा

कांगो में इस इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वायरस का संक्रमण इससे काफी पहले ही शुरू हो चुका था. WHO ने बताया कि कांगो में यह प्रकोप सही में फरवरी में शुरू हुआ था और कई महीनों बाद इसकी पहचान हो सकी. वहीं, WHO के अनुसार कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप की पुष्टि मई में हुई थी. संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ाने, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने, मरीजों को इलाज और आइसोलेशन की सुविधा देने के साथ जरूरी मेडिकल सामान की उपलब्धता पर काम कर रही हैं.

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किस कारण बनी बड़ी चिंता

इबोला के इस प्रकोप को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि वायरस आधिकारिक तौर पर सामने आने से पहले कितने समय तक फैलता रहा. WHO के मुताबिक, फरवरी में संक्रमण शुरू होने और मई में इसकी आधिकारिक घोषणा के बीच का अंतर काफी जरूरी है. किसी भी इबोला संक्रमण को रोकने में शुरुआती पहचान बेहद जरूरी होती है. इससे संक्रमित मरीजों को समय पर अलग किया जा सकता है, उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा सकता है और वायरस के आगे फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है.

कांगो में 17वीं बार फैला इबोला

यह कांगो में इबोला का 17वां प्रकोप है. इबोला वायरस की पहली पहचान 1976 में इबोला नदी के पास हुई थी. मौजूदा प्रकोप को कांगो का अब तक का सबसे बड़ा इबोला आउटब्रेक बताया जा रहा है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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