फिर बिगड़ी दिल्ली की हवा, गैस चैंबर में सांस लेने पर मजबूर हुए लोग
दीवाली के बाद से ही हर साल दिल्ली की हवा खराब हो जाती है. एक बार फिर से दिल्ली वासी गैस चैंबर में सांस लेने पर मजबूर हैं. चलिए जानते हैं क्या कहती है ये रिपोर्ट.

नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों से दिल्ली की वायु गुणवत्ता बदत्तर होती जा रही है. लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है. दिल्ली-एनसीआर एक गैस चैंबर बन गया है जिसमें लोग सांस लेने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं. वायु की खराब गुणवत्ता के कारण लोग कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. चलिए जानते हैं इस समय क्या है दिल्ली में प्रदूषण का हाल.
सोमवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बहुत बिगड़ गई. दिल्ली की हवा को इस समय सबसे खराब बताया जा रहा है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को AQI 234 के मुकाबले 252 की रीडिंग के साथ "खराब" श्रेणी में रहा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार को कुछ बारिश और तेज हवाएं हवा को साफ करने में मदद कर सकती हैं.
आईआईटी-दिल्ली के प्रोफेसर सग्निक डे का इस मामले में कहना है कि दिसंबर के अंत में एक बार फिर दिल्ली की हवा खराब हो सकती है. लेकिन पिछले कुछ सालों के आंकड़ें देखे तो वायु की गुणवत्ता ’बहुत खराब’ और ’गंभीर’ के बीच ही दिसंबर में रहने की आशंका है. आपको बता दें, आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में वायु प्रदूषण उतना खराब नहीं होता जितना दिवाली के बाद तुरंत बाद हो जाता है.
सोमवार को दिल्ली,-एनसीआर में प्रदूषण के आंकड़े- गाजियाबाद में (255), ग्रेटर नोएडा में (234), गुड़गांव में (232) और नोएडा में (236) और आसपास के क्षेत्र "खराब" वायु गुणवत्ता की श्रेणी में रहे.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे का औसतन तय मानकों पीएम 2.5 और पीएम 10 रीडिंग से लगभग दो गुना था जबकि एनसीआर का औसत रात 8 बजे तक पीएम 2.5 पर 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जबकि औसत पीएम 10 की एकाग्रता 201.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी.
GRAP के मानकों के तहत "आपातकालीन" बेंचमार्क की स्थिति तब होती है जब 300 और 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होते हैं, जबकि सुरक्षित मानक 60 और 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हैं.
नवंबर महीने की शुरुआत में 1 नवंबर से 5 नवंबर तक स्मोगी मौसम और 11 नवंबर से 15 नवंबर "आपातकालीन" वायु गुणवत्ता रीडिंग दर्ज की गई थी.
विशेषज्ञों के अनुसार, वायु की गुणवत्ता इतनी अधिक खराब होने का कारण मौसम ही है. 2016 में 28 अक्टूबर से 6 नवंबर और 2017 में 7 नवंबर से 14 नवंबर के बीच भी इसी तरह वायु की गुणवत्ता खराब हुई थी. हालांकि 2018 में 2 नवंबर से 4 नवंबर और 14 नवंबर से 16 नवंबर तक एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण दिल्ली और एनसीआर वायु की खराब गुणवत्ता से बच गया था.
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