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High Blood Pressure: क्या बीपी नॉर्मल होते ही आपने भी बंद कर दी है दवा? जान लें अचानक ऐसा करने के 5 बड़े नुकसान

Hypertension Awareness: बीपी के नॉर्मल होते ही हम दवा बंद कर देते हैं और डॉक्टर से संपर्क भी नहीं करते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आपका यह कदम आपके लिए कितना खतरनाक है.

Effects Of Skipping Blood Pressure Medication: हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते. जब तक शरीर को नुकसान होने लगता है, तब तक कई लोगों को अहसास ही नहीं होता. इसी वजह से बहुत-से मरीज अपनी दवाएं नियमित रूप से नहीं ले पाते. जब एक-दो गोली छोड़ने पर तुरंत कोई फर्क महसूस नहीं होता, तो दवा भूलना या बंद कर देना आसान लगने लगता है.

अक्सर लोग सोचते हैं कि कभी-कभार दवा न लेने से कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा. लेकिन सच्चाई यह है कि ब्लड प्रेशर की दवाएं आमतौर पर लंबे समय तक, कई बार पूरी जिंदगी के लिए दी जाती हैं. हां, कुछ खास स्थितियों जैसे प्रेग्नेंसी में दवा बदली या रोकी जा सकती है. वहीं कुछ मामलों में अगर लाइफस्टाइल में बड़े और स्थायी बदलावों से बीपी लगातार कंट्रोल में आ जाए, तो डॉक्टर की निगरानी में दवाएं धीरे-धीरे कम या बंद भी की जा सकती हैं.

क्या होता है दवाओं का रोल?

Medline Plus के अनुसार, ब्लड प्रेशर की दवाएं, जिन्हें एंटी-हाइपरटेंसिव कहा जाता है, शरीर में अलग-अलग तरीकों से काम करती हैं. ये नसों को रिलैक्स करती हैं, दिल पर पड़ने वाला दबाव कम करती हैं या शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी बाहर निकालने में मदद करती हैं. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा कम होता है.

दवा लेने के लिए समय तय करें

अगर कभी एक डोज छूट जाए, तो जैसे ही याद आए दवा ले लेनी चाहिए, जब तक अगली डोज का समय बहुत करीब न हो. एक डोज छोड़ना आमतौर पर ज्यादा दवा लेने से कम खतरनाक होता है. दवा भूलने से बचने के लिए इसे रोज एक तय समय पर लेना और किसी डेली की आदत से जोड़ना मददगार होता है, जैसे सुबह नाश्ते के साथ या रात को ब्रश के पास रखकर.

डॉक्टर से बात करके दवा बंद करने का डिसीजन लें

Health Central के अनुसार, अगर ब्लड प्रेशर के नंबर सुधर जाएं, तो दवा बंद करने का ख्याल आना स्वाभाविक है. लेकिन डॉक्टर से बात किए बिना दवा अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है. इससे सिरदर्द, चक्कर, सीने में दर्द, धड़कन तेज होना, सांस फूलना या अचानक बीपी का बहुत ज्यादा बढ़ जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बीपी 180/120 से ऊपर पहुंच जाए तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस माना जाता है, जो इमरजेंसी स्थिति है और इससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी डैमेज या अंधेपन तक का खतरा हो सकता है.

अगर डॉक्टर को लगता है कि दवा कम करने की संभावना है, तो सबसे सुरक्षित तरीका धीरे-धीरे डोज़ घटाना होता है. इसके लिए घर पर नियमित बीपी मॉनिटरिंग जरूरी होती है. अगर दवा लेते हुए भी बीपी लंबे समय तक नॉर्मल रेंज, जैसे 115/80 के आसपास बना रहे, तभी डॉक्टर दवा कम करने पर विचार करते हैं.

इसे भी पढ़ें- हरी मटर से कितनी अलग होती है फ्रोजन मटर, जानें इसे खाना सही या गलत?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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