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Bladder Cancer: सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी से थमेगा ब्लैडर कैंसर, दोबारा बीमारी लौटने का खतरा हुआ बेहद कम

Post-Surgery Radiation Therapy: कई मरीजों में ऑपरेशन के बाद भी बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है. खासतौर पर हाई-रिस्क मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर के मरीजों में यह चुनौती अधिक देखने को मिलती है.

How Radiation Therapy Helps In Bladder Cancer Treatment: ब्लैडर कैंसर के इलाज में सर्जरी को सबसे प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है, लेकिन कई मरीजों में ऑपरेशन के बाद भी बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है. खासतौर पर हाई-रिस्क मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर के मरीजों में यह चुनौती अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में एक नए स्टडी ने संकेत दिया है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और कैंसर की वापसी के जोखिम को कम कर सकती है. 

कैसे काम करती है रेडिएशन थेरेपी?

 जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी में पब्लिश रिसर्च निष्कर्ष में  एक फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल से सामने आया है. रिसर्चर ने पाया कि ब्लैडर को सर्जरी के जरिए हटाने और कीमोथेरेपी लेने के बाद रेडिएशन थेरेपी कराने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा उसी क्षेत्र में लौटने की संभावना कम रही. स्टडी के अनुसार, रेडिएशन थेरेपी से बीमारी पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है, हालांकि कुल जीवित रहने की दर और बीमारी- मुक्त रहने की अवधि में दिखा सुधार पूरी तरह महत्वपूर्ण नहीं माना गया. 

किन लोगों को रिसर्च में शामिल किया गया?

यह टेस्ट भारत के चार शैक्षणिक चिकित्सा केंद्रों में किया गया, जिसमें नॉन-मेटास्टेटिक मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर से पीड़ित 153 मरीज शामिल थे. इनमें से 71 प्रतिशत मरीजों को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी गई थी, जबकि करीब 20 प्रतिशत मरीजों ने सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी प्राप्त की. इसके बाद कुछ मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई, जबकि अन्य मरीजों को केवल निगरानी में रखा गया.

क्या निकला इसका रिजल्ट?

रेडियोथेरेपी सर्जरी या अंतिम कीमोथेरेपी सत्र के आठ सप्ताह के भीतर शुरू की गई. लगभग 47 महीने तक मरीजों की निगरानी के बाद रिसर्चर ने पाया कि दो साल तक कैंसर के स्थानीय या आसपास के हिस्सों में दोबारा न लौटने की दर रेडिएशन समूह में 87.1 प्रतिशत रही, जबकि केवल निगरानी वाले समूह में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था. रिसर्चर ने कहा कि एडजुवेंट पेल्विक इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी ने हाई-रिस्क यूरोथेलियल मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर मरीजों में लोकल कंट्रोल बेहतर किया और इसके साथ गंभीर बुरे प्रभाव में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं देखी गई. यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे सर्जरी के बाद दिए जाने वाले उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं.

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डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत 

स्टडी में यह भी देखा गया कि रेडिएशन लेने वाले मरीजों में डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत रही, जबकि दूसरे समूह में यह 58.7 प्रतिशत थी. इसी तरह ब्लैडर कैंसर-विशिष्ट सर्वाइवल और ओवरऑल सर्वाइवल के आंकड़े भी रेडिएशन समूह में बेहतर पाए गए.  हालांकि इन परिणामों को स्टेटिकल फॉर्म से निर्णायक नहीं माना गया. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिन मरीजों को पेल्विक रेडिएशन दी गई, उनमें लोकल या क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर की पुनरावृत्ति केवल 7.9 प्रतिशत मामलों में हुई. वहीं, निगरानी वाले समूह में यह दर 25.6 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि रेडिएशन थेरेपी कैंसर को उसी क्षेत्र में वापस आने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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