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मिशन गगनयान: 2025 में ISRO का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, जानिए क्यों है ये महत्वपूर्ण

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है. चन्द्रयान 3 और आदित्य एल 1 मिशन की सफलता के बाद इसरो 2025 में अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार है.

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है. चन्द्रयान 3 और आदित्य एल 1 मिशन की सफलता के बाद इसरो 2025 में अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार है.

केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र कुमार ने बीते रविवार को बताया कि 2025 में भारत अपना पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष और गहरे महासागर मिशन की शुरूआत करने वाला है. साल 2025 भारत के लिए बेहद खास होने वाला हैं क्योंकि गगनयान का अंतिम प्रक्षेपण 2025 में ही किया जाएगा. केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र कुमार ने कहा कि," किसी मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने से ज्यादा मुश्किल है उसे धरती पर वापस सुरक्षित और स्वस्थ्य तरीके से ले आना. 

भाजपा की एक बैठक में इतर पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, " यह एक क्रू मॉड्यूल और ऑपरेशनल मॉड्यूल हैं. साथ ही परिक्षण योजनाएं यह सुनिश्चित करेंगी की ये सभी मॉड्यूल योजना के अनुसार से ही काम करें. केन्द्रीय मंत्री ने इस बात का भी खुलासा किया है कि वास्तविक उड़ान से पहले अंतिम उड़ान में एक महिला रोबोट भी होगी, जिसका नाम व्योममित्रा रखा गया हैं. मानव अंतरिक्ष यात्री आखिरी उड़ान में जो भी गतिविधियां करेंगी वो व्योममित्रा भी करेंगी.

मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन "गगनयान" क्या है?

मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, जिसे गगनयान नाम दिया गया है, भारत का पहला मानव ह्यूमन स्पेस मिशन है जो की तीन दिन का होगा. 2025 में गगनयान मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रियों को तीन दिवसीय मिशन के लिए 400 कीमी दूर पृथ्वी की कक्षा में भेजना और फिर वापस सुरक्षित और स्वस्थ्य तरीके से ले आना है. यदि यह मिशन सफलतापूर्वक पूरा होता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन के लिए अंदाजन 90.23 करोड़ का बजट है. गगनयान मिशन की सफलता से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में अध्ययन और साथ ही अंतरिक्ष के वातावरण को समझने का मौका मिलेगा. यह मिशन देश को तकनीकी विकास में बेहतर दिशा देने में सहायता करेगा. 

इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि भारत का पहला मानव रहित अंतरिक्ष यान 2025 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री का चुनाव हो चुका है और वो अंतरिक्ष में जाने के लिए तैयार है. प्रमुख ने यह भी कहा कि इसरो एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की सोच रहा है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति लिए हर क्षेत्र में काम करने के लिए आवश्यक है.  

गहरे समुद्र मिशन का भी किया जिक्र

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है. इस लक्ष्य को पाने में नीली अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है. समुद्र मिशन भारत का पहला मानवयुक्त महासागर मिशन है जो समुद्र में समुद्र की गहराई में जाकर समुद्र के संसाधनों का अध्ययन और साथ ही जैव विविधता के बारे में अध्ययन करने के लिए डिजाईन किया गया है. गहरे समुद्र मिशन के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा कि, "एक भारतीय अंतरिक्ष में जा रहा है तो वहीं एक भारतीय समुद्र तल में ". केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि 2025 में एक भारतीय गोताखोर समुद्र में सबसे गहराई में जाएगा और अन्वेषण से खनिजों, धातुओं, जैव विविधता और वहां मौजूद संपूर्ण संपदा पर आधारित एक नीली अर्थव्यवस्था का मार्ग खुलेगा. साथ ही हमारे पास 7,500 किलोमीटर लंबा तट है, जो सारे देश की तुलना में सबसे लंबा है और नीली अर्थव्यवस्था 2025 में देश की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ावा देगी. साथ ही मंत्री ने भारत के पहले सौर्य मिशन आदित्य एल1 मिशन की सराहना की. चन्द्रयान 3 की सफलता के बाद आदित्य एल1 को भी सफलता हासिल हो चुकी है. आदित्य एल1 अब अपने गंतव्य बिंदु लैग्रेंज 1 पर पहुंच चुका है. सूर्य का अध्ययन करना इस मिशन का उद्देश्य है .  

कब हुई थी गहरे समुद्र मिशन की शुरूआत

29 अक्टूबर 2021 को केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र कुमार ने समुद्रयान मिशन को लॉन्च किया था. अमेरिका, जापान,रुस और चीन भारत से पहले इस मिशन की शुरूआत कर चुके है और अब भारत भी इस क्लब में शामिल हो चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन के लिए 6 हजार करोड़ की राशि को आवंटित किया गया है. समुद्रयान मिशन से भारत की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ेगी साथ ही यह मिशन भारत के लिए एक खास उपलब्धि होगा. यह मिशन भारत के राष्ट्रीय सम्मान को मजबूती देगा. विकासित देश पहले ही कई समुद्री मिशन को सफलता पूर्वक पहुंचा चुके है. वहीं भारत ऐसा करने वाला पहला विकाशील देश होगा. 

इस मिशन में एक मानव रहित पनडुब्बी से 3 लोगों को समुद्र की 6 किलोमीटर की गहराई में भेजा जाएगा. आमतौर पर पनडुब्बी समुद्र में 200 मीटर तक ही जाती हैं. लेकिन मिशन के लिए पनडुब्बी को बेहतर तकनीक के साथ बनाया जा रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा, पेयजल और नीली अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री संसाधनों का पता लगाने के लिए और अधिक विकास के रास्ते खुलेंगे। इस मिशन की कमान चेन्नई का राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान ने अपने हाथों में लिया हुआ है. इस मिशन के लिए जिस वाहन को तैयार किया जा रहा है, उसे 'MATSYA 6000' का नाम दिया गया है. समुद्रयान मिशन के लिए यह यान जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा.

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