मणिपुर में हटेगा राष्ट्रपति शासन, जानें मुख्यमंत्री को मिल जाएंगी कौन-कौन सी पावर?
Manipur Chief Minister Powers: राष्ट्रपति शासन हटते ही मणिपुर में फिर सत्ता चुनी हुई सरकार के हाथ में आने वाली है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर मुख्यमंत्री को कौन की शक्तियां मिल जाती हैं.

मणिपुर में करीब एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन अब हटने जा रहा है. फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे और उसके बाद भड़की हिंसा के चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. इस दौरान राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार और राज्यपाल के जरिए चलाया गया था. अब हालात में कुछ स्थिरता आने के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है. अब नए मुख्यमंत्री चुन लिए गए हैं, आइए जानें कि उनको कौन कौन सी पावर मिल जाएगी.
युमनाम खेमचंद सिंह होंगे नए मुख्यमंत्री
बीजेपी विधायक दल ने युमनाम खेमचंद सिंह को अपना नेता चुना है. इसके साथ ही उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. खेमचंद सिंह इससे पहले एन बीरेन सिंह की सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वे 2017 और 2022 में सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. इसके अलावा वे मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, यानी उन्हें सदन और प्रशासन दोनों का अनुभव है.
राष्ट्रपति शासन में क्या होता है?
राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य सरकार निलंबित रहती है. मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सभी शक्तियां खत्म हो जाती हैं. राज्यपाल केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रशासन चलाते हैं. बजट से लेकर कानून व्यवस्था तक, हर अहम फैसला दिल्ली की मंजूरी से होता है. चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाती है.
राष्ट्रपति शासन हटते ही क्या बदलेगा?
जैसे ही राष्ट्रपति शासन हटेगा, मणिपुर में संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार बहाल हो जाएगी. मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को फिर से कार्यकारी अधिकार मिल जाएंगे. राज्य के रोजमर्रा के फैसले, विकास योजनाएं और प्रशासनिक नियंत्रण दोबारा राज्य सरकार के हाथ में आ जाएगा.
मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री की सबसे अहम शक्ति मंत्रिपरिषद के गठन से जुड़ी होती है. मुख्यमंत्री राज्यपाल को सलाह देते हैं कि किसे मंत्री बनाया जाए. विभागों का बंटवारा भी मुख्यमंत्री ही तय करते हैं. अगर किसी मंत्री से मतभेद हो जाए या वह ठीक से काम न करे, तो मुख्यमंत्री उससे इस्तीफा देने को कह सकते हैं. मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही पूरी मंत्रिपरिषद को भी इस्तीफा देना पड़ता है.
राज्यपाल और मुख्यमंत्री का संबंध
संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत मुख्यमंत्री राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच सेतु होते हैं. राज्यपाल जब भी प्रशासन या फैसलों से जुड़ी जानकारी मांगते हैं, मुख्यमंत्री को पूरी जानकारी देनी होती है. अगर कोई फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बिना लिया गया हो, तो राज्यपाल उसे मंत्रिपरिषद के सामने दोबारा रखने को कह सकते हैं.
विधानसभा में मुख्यमंत्री की भूमिका
मुख्यमंत्री विधानसभा के नेता होते हैं. वे राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने, सत्रावसान करने या जरूरत पड़ने पर विधानसभा भंग करने की सलाह देते हैं. बजट पेश करना, कानून बनवाना और सदन में सरकार का पक्ष रखना मुख्यमंत्री की अहम जिम्मेदारी होती है.
नियुक्तियों में भी अहम दखल
राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक होती है. महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, राज्य चुनाव आयोग जैसे पदों पर नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री राज्यपाल को सलाह देते हैं. प्रशासनिक मशीनरी का संतुलन काफी हद तक मुख्यमंत्री के फैसलों पर निर्भर करता है.
वित्त और आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी
राज्य का बजट, वित्तीय प्राथमिकताएं और आपदा प्रबंधन भी मुख्यमंत्री की सीधी जिम्मेदारी होती है. राष्ट्रपति शासन के दौरान ये फैसले केंद्र के हाथ में होते हैं, लेकिन सरकार बनते ही इन पर मुख्यमंत्री और उनकी टीम का नियंत्रण हो जाता है. मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में कानून व्यवस्था और शांति बहाली मुख्यमंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
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Source: IOCL























