Women Reservation Bill: संसद में 54 वोट से कैसे गिर गया महिला आरक्षण से जुड़ा बिल, अब तक पेश हुए और बिल मोदी सरकार ने कैसे कराए पास?
Women Reservation Bill: 131वां संविधान संशोधन विधायक लोकसभा में पास नहीं हो पाया. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और सरकार अब तक कई बड़े कानून कैसे पास करा पाई.

- संविधान संशोधन विधेयक को विशेष बहुमत नहीं मिला।
- सरकार को 298 वोट मिले, 230 ने विरोध किया।
- विपक्षी एकजुटता और परिसीमन की चिंता मुख्य कारण।
- पिछली बार के विपरीत, इस बार विधेयक पर मतभेद।
Women Reservation Bill: 17 अप्रैल को संसद में एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा. दरअसल 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका. बहुमत होने के बावजूद भी सरकार संविधान संशोधनों के लिए जरूरी दो तिहाई के अहम आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई. इस हार ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर वह सरकार जिसने पिछले एक दशक में कई बड़े कानून पास किए हैं, इस बार कैसे लड़खड़ा गई? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
वे आंकड़े जिनकी वजह से विधेयक हार गया
विधेयक का पास ना होना पूरी तरह से संसदीय गणित का मामला था. वोट डालने वाले 528 सदस्यों में से 'विशेष बहुमत' नियम के तहत विधेयक को पास करने के लिए कम से कम 352 वोटों की जरूरत थी. सरकार को पक्ष में 298 वोट मिले जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया. इससे 54 वोटों की कमी रह गई. यह कमी निर्णायक साबित हुई. इसने बहुमत होने और संविधान में बदलाव के लिए जरूरी ज्यादा सख्त शर्तों को पूरा करने के बीच के फर्क को साफ कर दिया.
विशेष बहुमत बनाम साधारण बहुमत
विधेयक के पास ना होने की सबसे बड़ी वजह विधेयक का प्रकार है. संसद में पास होने वाले ज्यादातर कानून के लिए सिर्फ साधारण बहुमत यानी 50%+1 की जरूरत होती है. यह लोकसभा में सरकार के पास आसानी से होता है. लेकिन संविधान संशोधन विधेयकों के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है. यानी सदन में मौजूद और वोट डालने वाले सदस्यों को दो तिहाई बहुमत, साथ ही सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत की. इस मामले में सरकार के पास साधारण बहुमत के लिए तो काफी संख्या थी लेकिन संविधान संशोधन के लिए नहीं.
विपक्ष की एकजुटता
पिछली बार के उलट जब विपक्ष बंटा हुआ था इस बार सभी पार्टियों एकजुट थीं. INDIA गठबंधन और कई क्षेत्रीय पार्टियों ने इस विधेयक का जोरदार विरोध किया और इसे 'पीछे के दरवाजे से परिसीमन' की तरफ बढ़ाया गया कदम बताया. इस अनोखी एकजुटता ने यह पक्का किया कि सरकार दो तिहाई के आंकड़े को पार करने के लिए जरूरी अतिरिक्त वोट हासिल ना कर सके.
परिसीमन से जुड़ी चिंता
विरोध का एक मुख्य कारण लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था. कई पार्टियों को डर था कि इससे राजनीतिक संतुलन बिगड़ जाएगा और संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा. इस चिंता की वजह से जो पार्टियां पहले विधेयक का समर्थन कर रही थीं वे भी इसके विरोध में खड़ी हो गई.
पहले के विधेयक आसानी से कैसे पास हो गए?
पिछले 11 सालों में सरकार ने कई बड़े कानून इसलिए आसानी से पास कर लिए थे क्योंकि उस समय विपक्ष बंटा हुआ था. कई मामलों में क्षेत्रीय पार्टियों ने या तो सरकार का समर्थन किया या फिर वोटिंग के दौरान सदन से बाहर चली गई. इससे सदन की प्रभावी संख्या कम हो गई. इसके अलावा कुछ विवादित कानूनों को मनी बिल के तौर पर पेश किया गया. इनके लिए सिर्फ लोकसभा की मंजूरी ही काफी होती है. इस तरह राज्यसभा में होने वाले विरोध को दरकिनार कर दिया गया.
2023 और 2026 के महिला विधायकों के बीच अंतर
2023 का महिला आरक्षण कानून भारी समर्थन के साथ आसानी से पारित हो गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें इसका कार्यान्वयन भविष्य की जनगणना और परिसीमन के बाद तक के लिए टाल दिया गया था. लेकिन 2026 के विधेयक में कार्यान्वयन को तेजी से लागू करने और इसे सीधे तौर पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ने की कोशिश की गई थी. इस बदलाव से राजनीतिक टकराव पैदा हुआ और आम सहमति विरोध में बदल गई. यही वजह है कि विधेयक पारित नहीं हो सका.
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Source: IOCL



























