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इस मुस्लिम देश में 20 साल तक रहा अमेरिका, जानें क्यों उसे सबकुछ छोड़कर वापस लौटना पड़ा?

दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां अमेरिका ने अपने दुश्मन को खत्म करने के लिए सेना भेजी . इन्हीं देशों में एक है अफगानिस्तान. चलिए, जानते हैं कि आखिर अमेरिका को अफगानिस्तान से वापस क्यों लौटना पड़ा

काबुल की सड़कों पर अमेरिकी टैंकों की गरज, आसमान में फाइटर जेट्स की उड़ान और हर चौराहे पर विदेशी सैनिकों की तैनाती… ये तस्वीर कभी अफगानिस्तान की पहचान बन चुकी थी, लेकिन साल 2021 में वह वक्त आया, जब अमेरिका को 20 साल बाद अपना सबकुछ छोड़कर इस देश से वापस लौटना पड़ा. आखिर ऐसा क्या हुआ कि दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली सेना को इस्लामी चरमपंथियों के सामने घुटने टेकने पड़े? आइए जानते हैं अमेरिका और अफगानिस्तान के इस 20 साल लंबे दखल और वापसी की पूरी कहानी.

क्यों हुई थी अमेरिकी की एंट्री?

अमेरिका इस देश से क्यों लौटा, यह जानने से पहले यह जान लीजिए कि अमेरिका ने इस देश में एंट्री क्यों मारी थी? 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए इस आतंकी हमले में हजारों लोग मारे गए. इस हमले के पीछे अल-कायदा का हाथ था, जिसे खत्म करने के लिए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 'वॉर ऑन टेरर' की घोषणा की. इसी साल 2001 में अक्टूबर के महीने में अफगानिस्तान की धरती पर अमेरिका की एंट्री हुई. अमेरिका का मकसद था तालिबान को हटाना और अल-कायदा को खत्म करना था. इसके लिए वह 20 साल तक अफगानिस्तान में संघर्ष करता रहा. 

क्यों हुई वापसी?

करीब 20 साल तक अफगानिस्तान में रहने के बाद अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी हुई. 2018 से अमेरिका तालिबान से बातचीत कर रहा था. ट्रंप सरकार ने कतर में बातचीत शुरू की, जिसे आगे बढ़ाकर बाइडन सरकार ने 2021 में अफगानिस्तान से पूरी तरह हटने का ऐलान कर दिया. 15 अगस्त 2021 को जैसे ही अमेरिकी सेना ने वापसी शुरू की तो तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन 20 साल के दौरान 6,384 अमेरिकी सैनिक मारे गए. इसके साथ अमेरिकी-अफगान युद्ध में 2.41 लाख मौतें हुईं.

अमेरिका की वापसी के पीछे कई कारण बताए जाते हैं, जिनमें अफगान सरकार की कमजोर पकड़ और भ्रष्टाचार ने फिर से तालिबान को अफगानिस्तान में जमीनी पकड़ और रणनीति से मजबूती प्रदान की. इसके अलावा 2020 में कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था, जिसमें तालिबान ने अपने नियंत्रण वाले इलाके में अल कायदा और दूसरे चरमपंथी संगठनों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की बात भी कही थी. लंबी लड़ाई से थकान और भारी आर्थिक बोझ ने अमेरिका को वापस लौटने के लिए मजबूर किया था. 

अफगानिस्तान से वापसी अमेरिका के लिए एक हार

अफगानिस्तान से वापसी के बाद अमेरिका की जमकर आलोचना हुई थी. कई संगठनों ने इसे अफगानिस्तान के लोगों के साथ एक छल बताया था. जिस तालिबान को खत्म करने वह अफगानिस्तान में गया था, तकनीकी रूप से देखा जाए तो अमेरिका तालिबान को खत्म नहीं कर पाया.  उसकी वापसी के बाद अफगानिस्तान में फिर से तालिबान सत्ता में है.

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