क्या होती है शताब्दी एक्सप्रेस? कैसे पड़ा इस ट्रेन का यह नाम
देश की पहली प्रीमियम शताब्दी एक्सप्रेस की शुरुआत 1988 में हुई थी, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म शताब्दी वर्ष के मौके पर शुरू होने के कारण ही इस ट्रेन का नाम शताब्दी रखा गया था.

भारतीय रेलवे की सबसे तेज और भरोसेमंद ट्रेनों में शताब्दी एक्सप्रेस का नाम हमेशा ऊपर आता है. दिन में चलने वाली इस सुपरफास्ट ट्रेन का इस्तेमाल आमतौर पर वो यात्री करते हैं, जिन्हें एक ही दिन में जाकर वापस लौटना होता है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस ट्रेन का नाम किसी सामान्य वजह से नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद में रखा गया था. आइए जानते हैं कि आखिर शताब्दी एक्सप्रेस क्या है और इसका यह खास नाम कैसे पड़ा.
क्या है शताब्दी एक्सप्रेस?
शताब्दी एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की सुपरफास्ट श्रेणी की ट्रेन है, जो पूरी तरह एयर कंडीशंड होती है और मुख्य रूप से देश के बड़े और व्यावसायिक रूप से अहम शहरों को आपस में जोड़ती है. यह ज्यादातर डे ट्रेन होती हैं, यानी सुबह अपने शुरुआती स्टेशन से रवाना होकर उसी दिन वापस लौट आती हैं. इनकी अधिकतम रफ्तार 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है, जिससे यह देश की सबसे तेज ट्रेनों में गिनी जाती हैं. इनमें एग्जीक्यूटिव चेयर कार और एसी चेयर कार जैसी क्लास होती हैं, साथ ही खाने-पीने की सुविधा भी ऑनबोर्ड ही दी जाती है.
कैसे पड़ा इस ट्रेन का नाम?
संस्कृत भाषा में शताब्दी शब्द का मतलब होता है सदी यानी सौ साल. 10 जुलाई 1988 को तत्कालीन रेल मंत्री माधवराव सिंधिया ने पहली शताब्दी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी. यह ट्रेन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्म शताब्दी यानी उनके जन्म के 100 साल पूरे होने के मौके पर शुरू की गई थी, इसीलिए इस ट्रेन को शताब्दी एक्सप्रेस नाम दिया गया.
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कहां से कहां चली थी पहली शताब्दी?
पहली शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली से ग्वालियर के बीच चलाई गई थी, जो उस वक्त देश की सबसे तेज ट्रेन मानी जाती थी और इसकी अधिकतम रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक थी. शुरुआत में इस ट्रेन को एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया, हालांकि समाज के एक वर्ग ने इसकी आलोचना भी की, क्योंकि उनका मानना था कि भारत जैसे विकासशील देश में इतनी महंगी और आधुनिक ट्रेन की जरूरत नहीं है. बाद में इस रूट को आगे बढ़ाकर भोपाल के हबीबगंज स्टेशन तक कर दिया गया.
अब कितनी चलती हैं शताब्दी ट्रेनें?
आज देशभर के अलग-अलग रूट पर करीब दो दर्जन शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, जिनमें से 6 जोड़ी ट्रेनें सीधे नई दिल्ली से शुरू होती हैं. इनमें भोपाल शताब्दी को देश की सबसे तेज शताब्दी ट्रेन माना जाता है. इसके अलावा एक प्रीमियम वर्जन भी है, जिसे स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस कहा जाता है, जो सामान्य शताब्दी के मुकाबले ज्यादा शानदार सुविधाओं के साथ आती है. बाद में रेलवे ने इसी ट्रेन का बिना एसी और कम किराए वाला वर्जन भी शुरू किया, जिसे जन शताब्दी एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता है.
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