अलग अलग क्यों होते हैं सवारी और माल गाड़ी के इंजन? क्या है वजह
सवारी और मालगाड़ी के इंजन उनके काम के हिसाब से अलग होते है, पैसेंजर ट्रेन के इंजन तेज रफ्तार के लिए हॉर्सपावर पर फोकस करते हैं, जबकि मालगाड़ी इंजन भारी वजन खींचने के लिए अधिक टॉर्क पैदा करते हैं.

रेलवे स्टेशन पर अक्सर लोग देखते हैं कि पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी दोनों को अलग-अलग तरह के इंजन खींचते हैं. भारतीय रेलवे में जहां WAP-5 और WAP-7 जैसे इंजन पैसेंजर ट्रेनों के लिए इस्तेमाल होते हैं, वहीं WAG-9 और WAG-12 जैसे इंजन खासतौर पर मालगाड़ी के लिए बनाए जाते हैं. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि जब दोनों ही इंजन बिजली या डीजल से चलते हैं, तो फिर इन्हें अलग-अलग क्यों बनाया जाता है, क्यों एक ही इंजन से दोनों तरह की ट्रेनें नहीं खींची जा सकतीं. इसका जवाब छिपा है इंजन के गियर रेशियो यानी में, जो स्पीड और ताकत के बीच संतुलन तय करता है.
टॉर्क और स्पीड के बीच है सीधा रिश्ता
किसी भी इंजन को शुरुआत में भारी वजन खींचने के लिए ज्यादा ट्रैक्टिव इफर्ट यानी खींचने की ताकत चाहिए होती है, लेकिन ज्यादा ताकत हासिल करने में अक्सर रफ्तार धीमी हो जाती है. यही वजह है कि इंजीनियर एक ही इंजन में दोनों चीजें, ज्यादा ताकत और ज्यादा रफ्तार, दोनों एक साथ हासिल नहीं कर पाते. मालगाड़ी को हजारों टन वजन खींचना होता है, इसलिए उसे तेज रफ्तार के बजाय ज्यादा ताकत की जरूरत होती है, जबकि पैसेंजर ट्रेन को समय पर पहुंचना ज्यादा जरूरी होता है, इसलिए उसे ताकत के बजाय रफ्तार की जरूरत होती है.
गियर रेशियो में छिपा है असली राज
मालगाड़ी के इंजन में गियर रेशियो ज्यादा रखा जाता है, जिससे मोटर की घूमने की ताकत पहियों तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना बढ़ जाती है, इससे भारी वजन को शुरुआत में खींचना आसान हो जाता है, लेकिन इंजन की टॉप स्पीड कम रह जाती है. इसके उलट पैसेंजर इंजन में गियर रेशियो कम रखा जाता है, जिससे शुरुआती खींचने की ताकत कुछ कम रहती है, लेकिन इंजन ज्यादा तेज रफ्तार पकड़ पाता है.
उदाहरण के लिए, WAP-7 पैसेंजर इंजन की टॉप स्पीड 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक जाती है, जबकि इसी जैसे प्लेटफॉर्म पर बना WAG-9 मालगाड़ी इंजन सिर्फ 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही चल पाता है, लेकिन उसकी खींचने की ताकत कहीं ज्यादा होती है.
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वजन और डिजाइन में भी है फर्क
मालगाड़ी के इंजन आमतौर पर पैसेंजर इंजन के मुकाबले भारी बनाए जाते हैं, क्योंकि इंजन का वजन जितना ज्यादा होगा, पहियों और पटरी के बीच उतनी ही ज्यादा पकड़ बनेगी, जिससे भारी वजन खींचते समय पहिए फिसलेंगे नहीं. वहीं पैसेंजर इंजन को हल्का रखा जाता है, ताकि वह तेज रफ्तार पर भी आसानी से नियंत्रित रह सके और पटरियों पर कम दबाव डाले.
मिक्स्ड लोकोमोटिव भी होते हैं मौजूद
कुछ इंजन ऐसे भी बनाए जाते हैं, जिन्हें 'मिक्स्ड-ट्रैफिक लोकोमोटिव' कहा जाता है, जो पैसेंजर और मालगाड़ी दोनों तरह की ट्रेनें खींचने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. इनमें गियर रेशियो को इस तरह सेट किया जाता है कि यह न तो मालगाड़ी इंजन जितनी ज्यादा ताकत दे पाए और न ही पैसेंजर इंजन जितनी तेज रफ्तार, बल्कि दोनों के बीच एक संतुलन बनाकर काम करे.
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