क्या अपनी कार को भी करवा सकते हैं बुलेट प्रूफ, इसमें कितना खर्चा?
बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच जानिए क्या कोई भी आम नागरिक अपनी गाड़ी को बुलेटप्रूफ करवा सकता है? गृह मंत्रालय के कड़े नियमों, परमिशन की प्रक्रिया और इसका कुल खर्च.

बॉलीबुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई में हुई हालिया फायरिंग की घटना ने पूरे देश को चौंका दिया है. इस हमले में उनकी कार पर सात राउंड गोलियां चलाई गईं, जिससे सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है. इस घटना के बाद बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक आम कार को सुरक्षा के लिहाज से बुलेटप्रुफ बनाया जा सकता है. भारत में कार को बुलेटप्रुफ करवाने के कानूनी नियम क्या हैं और इसमें कितना पैसा खर्च होता है.
क्या कोई भी अपनी कार को करवा सकता है बुलेटप्रुफ?
भारत के कानून के मुताबिक, कोई भी नागरिक अपनी निजी सुरक्षा के लिए अपनी कार को बुलेटप्रुफ गाड़ी में तब्दील करवा सकता है. लेकिन आप बिना इजाजत के सीधे मैकेनिक के पास जाकर ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि कार में इस तरह का बदलाव एक बड़ा स्ट्रक्चरल मॉडिफिकेशन माना जाता है.
इसके लिए आपको एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. सबसे पहले आपको स्थानीय पुलिस प्रशासन ने Police NOC लेना होता है. इसके बाद जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और देश के गृह मंत्रालय से आधिकारिक अनुमति लेनी अनिवार्य होती है. सरकार आपकी जान को खतरे की समीक्षा करने के बाद ही इसकी मंजूरी देती है. अनुमति मिलने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को भी RTO में अपडेट कराना पड़ता है.
कार को बुलेटप्रुफ बनाने में कितना आता है खर्च?
किसी साधारण कार को चलते-फिरते बख्तरबंद किले में बदलने का खर्च काफी ज्यादा होता है, जो पूरी तरह से गाड़ी के साइज, उसके मॉडल और सुरक्षा के स्तर BR4 या BR6 रेटिंग पर निर्भर करता है.
अगर खर्च के आंकड़ों की बात करें, तो एक सामान्य हैचबैक कार को बुलेटप्रुफ बनाने में 20 लाख से 30 लाख रुपये तक का खर्च आता है. वहीं अगर आप फॉर्च्यूनर या स्कॉर्पियो जैसी SUV को बुलेटप्रुफ करवाना चाहते हैं, तो यह खर्च 35 लाख से 60 लाख के बीच बैठता है. यदि कोई मर्सिडीज या BMW जैसी महंगी कार को हाई-लेवल सुरक्षा देना चाहता है, तो खर्च आसानी से 70 लाख से 1 करोड़ तक पहुंच जाता है.
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किन चीजों को बदलने में लगता है सबसे ज्यादा पैसा?
कार को सुरक्षित बनाने के लिए उसके कई हिस्सों को पूरी तरह बदल दिया जाता है, जिससे उसका वजन लगभग 800 किलो से 1 टन तक बढ़ जाता है। इसी वजह से इसके कलपुर्जों पर भारी खर्च होता है.
गाड़ी के साधारण शीशों को हटाकर 30mm से 40mm मोटे बुलेटप्रूफ ग्लास लगाए जाते हैं, जिनकी कीमत ही केवल 7 लाख रुपये से अधिक होती है. इसके अलावा गाड़ी के टायरों को जर्मनी या अन्य देशों से आयातित विशेष Run-Flat Tyres से बदला जाता है, जो गोली लगने के बाद भी 100 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ी को दूर ले जा सकते हैं. इन टायरों की कीमत 2 से 5 लाख रुपये तक होती है. गाड़ी की बॉडी को मजबूत करने के लिए विदेशों से मंगाया गया बख्तरबंद स्टील लगाया जाता है और फ्यूल टैंक को भी ब्लास्ट-प्रूफ बनाया जाता है. भारी वजन को संभालने के लिए गाड़ी के सस्पेंशन और ब्रेक्स को भी पूरी तरह अपग्रेड किया जाता है.
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