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Indus Valley: एडवांस टाउन प्लानिंग, ड्रेनेज और सीवेज सिस्टम के बावजूद कैसे खत्म हो गई सिंधु घाटी सभ्यता, आखिर हुआ क्या था?

Indus Valley: सिंधु घाटी एडवांस्ड टाउन प्लानिंग और सीवेज सिस्टम के साथ दुनिया की सबसे आधुनिक शहरी समाज में से एक थी. लेकिन इसके बावजूद भी इसका पतन हो गया. आइए जानते हैं वजह

Indus Valley: सिंधु घाटी सभ्यता जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है प्राचीन दुनिया के सबसे एडवांस्ड शहरी समाजों में से एक थी.  सुनियोजित शहर, ड्रेनेज सिस्टम और फलते फूलते व्यापारिक नेटवर्क के साथ यह सभ्यता काफी ज्यादा एडवांस्ड थी. लेकिन इसके बावजूद भी 1900 ईसा पूर्व और 1700 ईसा पूर्व के बीच इस सभ्यता का धीरे-धीरे पतन हो गया.  आइए जानते हैं क्या थी इसके पीछे की वजह.

जलवायु परिवर्तन और लंबे समय तक सूखा

पतन के पीछे की सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक चला जलवायु परिवर्तन था. स्टडी से ऐसा पता चलता है कि लगभग 4200 साल पहले मानसून के पैटर्न काफी ज्यादा कमजोर हो गए थे. इसकी वजह से लगभग दो शताब्दियों तक चलने वाला भीषण सूखा पड़ा. कृषि इस सभ्यता की रीढ़ थी, लेकिन इस दौरान वह भी पूरी तरह से ठप हो गई. ऐसा इसलिए क्योंकि पानी के स्रोत सूख गए थे.

नदियों ने अपने रास्ते बदल लिए 

हड़प्पा के शहरों को बनाए रखने में नदियों ने एक बड़ी भूमिका निभाई. हालांकि सिंधु नदी और अब लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी जैसी प्रमुख नदियों ने या तो अपना रास्ता बदल लिया या फिर  वे सूख गई.  इसने उपजाऊ भूमि को  बंजर बना दिया और लोगों को शहरों को छोड़कर कहीं और पलायन करना पड़ा. 

बाढ़ ने शहरों को तबाह कर दिया 

दरअसल कुछ क्षेत्रों में तो सूखा पड़ रहा था लेकिन कुछ क्षेत्रों में भयानक बाढ़ आई. मोहनजोदड़ो से मिले पुरातात्विक साक्ष्य बार-बार आई बाढ़ की परतों को दर्शाते हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि अचानक आई बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया.

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संसाधनों का इस्तेमाल 

हड़प्पावासी ईंटों को पकाने और निर्माण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी का इस्तेमाल करते थे. समय के साथ जंगलों की कटाई ने शायद पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ दिया. 

इस सभ्यता के मेसोपोटामिया जैसे क्षेत्रों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध थे. हालांकि जैसे-जैसे पर्यावरणीय परिस्थितियां बिगड़ीं व्यापारिक रास्ते कमजोर पड़ गए. इससे आर्थिक स्थिरता और समृद्धि में कमी आई.

शहरी पतन और पलायन 

जैसे-जैसे स्थिति खराब होती गई शहरों ने अपनी संरचना खोना शुरू कर दिया. सुनियोजित सड़के संकरी गलियों में बदल गई और लोगों ने पुरानी ईंटों का इस्तेमाल करके अस्थायी घर बनाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे आबादी उपजाऊ गंगा के मैदानों की तरफ पलायन कर गई. इसने शहरी हड़प्पा जीवन के अंत का संकेत दिया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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