Heatwave Deaths In India: हीट वेव से देश में हर साल कितनी मौतें, देख लीजिए आंकड़े
Heatwave Deaths In India: NCRB ने हाल ही में डेटा जारी किया है, जिसमें बताया है कि हर साल कितने लोगों की हीटवेव से मौत हो गई. महाराष्ट्र और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं. आइए आंकड़ों से समझें.

- लू से हृदय, दिमाग और किडनी पर दबाव से मौत.
Heatwave Deaths In India: देशभर में इन दिनों पारा लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया है. मौसम विभाग ने भी यलो अलर्ट जारी कर लोगों को सचेत रहने की सलाह दी है, लेकिन इस भीषण गर्मी के पीछे की एक बेहद डरावनी सच्चाई यह है कि यह केवल असुविधा का कारण नहीं, बल्कि काल का ग्रास भी बन रही है. सरकारी आंकड़ों की पड़ताल करें तो स्पष्ट होता है कि बढ़ती गर्मी हर साल हजारों परिवारों में मातम पसरने की बड़ी वजह बन रही है.
NCRB के चौंकाने वाले आंकड़े
गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से 2022 के बीच हीटवेव यानी लू की चपेट में आने से कुल 3,798 लोगों की असामयिक मृत्यु हुई है. ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि गर्मी का बढ़ता प्रकोप किस हद तक जानलेवा साबित हो रहा है. इन पांच वर्षों के दौरान सबसे अधिक मौतों का रिकॉर्ड महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में देखा गया है, जो इस समस्या की गंभीरता को बयां करता है.
महाराष्ट्र और बिहार में गर्मी का सबसे ज्यादा तांडव
आंकड़ों पर गौर करें तो महाराष्ट्र इस सूची में टॉप पर है, जहां 2018 से 2022 के बीच कुल 470 लोगों ने भीषण गर्मी के कारण अपनी जान गंवाई. महाराष्ट्र में वर्ष 2019 सबसे खतरनाक रहा, जिसमें 159 लोगों को लू के कारण दम तोड़ना पड़ा. वहीं, दूसरे स्थान पर बिहार है, जहां पांच सालों में कुल 467 मौतें दर्ज की गईं. बिहार में भी 2019 का वर्ष सबसे घातक साबित हुआ, जिसमें एक ही साल में 215 लोगों की मृत्यु हुई थी. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी यह आंकड़ा प्रतिवर्ष चिंताजनक रूप से बढ़ता रहा है.
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राज्यवार मौतों का दर्दनाक विश्लेषण
यदि हम पूरे भारत के आंकड़ों को देखें, तो 2018 में 890, 2019 में 1274, 2020 में 530, 2021 में 374 और 2022 में 730 लोगों की मौत दर्ज की गई है. उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी मौतों का आंकड़ा लगातार तीन अंकों में रहा है, जो यह दर्शाता है कि उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से हीटवेव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं. अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड जैसे पर्वतीय या उत्तर-पूर्वी राज्यों में गर्मी से मौत के मामले नगण्य रहे हैं, जो स्पष्ट करता है कि भौगोलिक स्थितियां मौतों की संख्या को तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं.
हीटवेव कैसे बनती है शरीर के लिए मौत का बुलावा?
हीटवेव के दौरान, जब सूरज की किरणें सीधी और बिना बारिश के बरसती हैं, तो जमीन और हवा दोनों अंगारे की तरह जलने लगते हैं. वैज्ञानिक रूप से समझें, तो अत्यधिक गर्मी शरीर की तापमान को नियंत्रित करने की आंतरिक क्षमता को पूरी तरह बिगाड़ देती है. जब शरीर का तापमान एक सुरक्षित सीमा से ऊपर निकल जाता है, तो स्थिति जानलेवा हो जाती है. शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक पसीना बहाता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. पानी और नमक यानी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर चक्कर आने, बेहोशी और अंततः मौत की संभावना प्रबल हो जाती है.
अंगों पर दबाव और फेल होने का खतरा
भीषण गर्मी का असर केवल बाहर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के भीतर अंगों पर भी भारी दबाव बनाता है. लू के दौरान हृदय को शरीर को ठंडा रखने के लिए सामान्य से कहीं अधिक तेजी से काम करना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बिगड़ जाता है. इसके साथ ही, दिमाग और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव इतना बढ़ जाता है कि शरीर के कई अंग एक साथ काम करना बंद कर सकते हैं. चिकित्सा भाषा में इसे 'हीट स्ट्रोक' कहते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर मौत का कारण बनता है.
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Source: IOCL


























