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परमाणु बम बनाने से पीछे क्यों हटे थे आइंस्टीन, मैनहट्टन प्रोजेक्ट में क्यों नहीं हुए थे शामिल?

आज के समय में देश लड़ाई होने पर तुरंत परमाणु हमले की चेतावनी देने लगते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आइंस्टीन परमाणु बम बनाने से पीछे हट गए थे. आइए जानें कि इसे पीछे का कारण क्या था.

परमाणु बम का नाम आते ही दिमाग में तबाही, आग और धुएं का बादल उभर आता है, लेकिन इस विनाशकारी हथियार के पीछे एक ऐसा इंसान भी था, जिसने इसकी संभावना तो बताई, पर इसे बनाने से साफ इनकार कर दिया. वही वैज्ञानिक, जिनका एक सूत्र पूरी परमाणु ऊर्जा की नींव बना. उनका नाम है अल्बर्ट आइंस्टीन. अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिस आदमी की सोच से यह शक्ति पैदा हुई, उसने खुद इसे हथियार बनाने से दूरी क्यों बना ली?

परमाणु बम और आइंस्टीन की अजीब विडंबना

इतिहास की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि परमाणु बम की बुनियाद रखने वाले अल्बर्ट आइंस्टीन खुद इस हथियार के खिलाफ थे. उनका प्रसिद्ध समीकरण E=mc² परमाणु ऊर्जा की समझ का आधार बना, लेकिन आइंस्टीन कभी भी बम बनाने की दौड़ का हिस्सा नहीं बने. वे वैज्ञानिक थे, लेकिन विनाश के शिल्पकार नहीं रहे. 

1939 का खतरे से भरा पत्र

साल 1939 में दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी थी. इसी दौरान आइंस्टीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट को एक पत्र पर हस्ताक्षर किए. यह पत्र भौतिक विज्ञानी लियो स्जिलार्ड ने तैयार किया था. इसमें चेतावनी दी गई थी कि एडॉल्फ हिटलर का शासन यूरेनियम-आधारित महाहथियार विकसित करने के लिए कोड को क्रैक कर सकता है. आइंस्टीन का नाम और हस्ताक्षर इतने प्रभावशाली थे कि अमेरिका ने इस चेतावनी को गंभीरता से लिया. यही पत्र आगे चलकर मैनहैटन प्रोजेक्ट की नींव बना. यह परियोजना अंततः एक गुप्त युद्धकालीन प्रयास बन गई, जिसके परिणामस्वरूप पहले परमाणु बम बनाए गए और फिर, कहानी में एक नया मोड़ आया. 

मैनहैटन प्रोजेक्ट से आइंस्टीन की दूरी

चौंकाने वाली बात यह है कि जिस मैनहैटन प्रोजेक्ट ने दुनिया के पहले परमाणु बम बनाए, उसमें आइंस्टीन को शामिल ही नहीं किया गया. उन्हें कोई गोपनीय दस्तावेज नहीं दिखाया गया और न ही आधिकारिक तौर पर बुलाया गया. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आइंस्टीन पर पूरी तरह भरोसा नहीं था. उनकी शांति की सोच, तानाशाही सरकारों की खुली आलोचना और वामपंथी विचारों से जुड़ाव अधिकारियों को असहज करता था. 

अगर बुलाया जाता, तब भी जवाब ‘न’ होता

इतिहासकारों का मानना है कि अगर आइंस्टीन को मैनहैटन प्रोजेक्ट में शामिल होने का न्योता मिलता, तब भी वे मना कर देते. वजह साफ थी कि वे खुद अपनी खोजों को हथियार बनते नहीं देखना चाहते थे. आइंस्टीन एक विचारक थे, इंजीनियर नहीं वे प्रकृति के नियम समझना चाहते थे, न कि उनसे तबाही मचाना. उन्हें पता था कि यह रास्ता कहां ले जाएगा और वे इस पर चलना नहीं चाहते थे. इसलिए जब आखिरकार उन्हें परमाणु बम बनाने के प्रोजेक्ट मैनहट्टन में भाग लेने के लिए कहा गया, तो उन्होंने यह कहा- चूहा कभी चूहेदानी नहीं बनाता. 

हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद आइंस्टीन को गहरा पछतावा हुआ. उन्हें लगा कि उन्होंने चेतावनी देकर भले ही सही किया हो, लेकिन नतीजा इंसानियत के लिए भयावह साबित हुआ. 

परमाणु हथियारों के खिलाफ जीवनभर की लड़ाई

युद्ध के बाद आइंस्टीन ने अपना ध्यान परमाणु निरस्त्रीकरण पर लगा दिया. वे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और परमाणु ऊर्जा पर वैश्विक नियंत्रण के समर्थक बन गए. प्रिंसटन में बैठकर उन्होंने बार-बार चेतावनी दी कि अगर दुनिया ने सबक नहीं लिया, तो अगली परमाणु दौड़ मानवता का अंत कर सकती है.

यह भी पढ़ें: गोल्ड क्रैश के बीच खरीदा 2 लाख का सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें पूरी डिटेल

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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