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बंगाल तो भारत के ईस्ट में है, फिर इसे क्यों कहते हैं वेस्ट बंगाल? जान लीजिए वजह

पश्चिम बंगाल का नाम दिशा की वजह से नहीं, इतिहास की वजह से पड़ा. यह नाम उस बड़े बंगाल प्रांत की याद है, जो कभी भारत और बांग्लादेश तक फैला हुआ था. आइए जानें कि इसका नाम क्यों पड़ा.

भारत के नक्शे को देखें तो एक सवाल अपने आप दिमाग में आता है. जो राज्य देश के बिल्कुल पूर्वी हिस्से में है पश्चिम बंगाल, उसके नाम में पश्चिम कैसे जुड़ गया? पहली नजर में यह अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे सदियों पुरा इतिहास, औपनिवेशिक राजनीति और आज़ादी के वक्त लिया गया एक बड़ा फैसला छिपा है. पश्चिम बंगाल का नाम दरअसल सिर्फ दिशा नहीं, बल्कि भारत के सबसे अहम ऐतिहासिक अध्याय की कहानी है.

बंगाल भारत के पूर्व में, फिर नाम पश्चिम क्यों?

पश्चिम बंगाल आज भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित है. इसके बावजूद इसके नाम में  पश्चिम  शब्द जुड़ा हुआ है. इसकी वजह भूगोल नहीं, बल्कि इतिहास है. कभी बंगाल एक विशाल प्रांत हुआ करता था, जो आज के पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और कुछ पड़ोसी इलाकों तक फैला था. उसी बड़े बंगाल के पश्चिमी हिस्से को आज हम पश्चिम बंगाल के नाम से जानते हैं.

बंगाल नाम की जड़ें कहां से आईं?

बंगाल नाम की उत्पत्ति प्राचीन शब्द वांगा या बंगा से मानी जाती है. इतिहासकारों के अनुसार इस क्षेत्र में करीब 4000 साल पहले सभ्यताओं के निशान मिलते हैं. यहां द्रविड़, ऑस्ट्रो-एशियाई और तिब्बती-बर्मन समुदायों का प्रभाव रहा. समय के साथ यह इलाका सांस्कृतिक, व्यापारिक और राजनीतिक रूप से बेहद समृद्ध बन गया.

प्राचीन और मध्यकालीन बंगाल का सफर

सिकंदर के आक्रमण के दौर में बंगाल में गंगारिदई नाम का शक्तिशाली साम्राज्य था. इसके बाद मौर्य और गुप्त साम्राज्य का प्रभाव यहां देखने को मिला. सातवीं सदी में राजा शशांक ने बंगाल को एक मजबूत पहचान दी. बाद में गोपाल ने पाल वंश की स्थापना की, जिसने करीब 400 साल तक शासन किया. पाल वंश के बाद सेन वंश आया, जिसे आगे चलकर दिल्ली सल्तनत के शासकों ने पराजित किया.

अंग्रेजों की एंट्री और राजनीति

1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद अंग्रेजों ने बंगाल को अपनी सत्ता का केंद्र बनाया. बंगाल उस समय भारत का सबसे समृद्ध इलाका था. अंग्रेजों ने प्रशासनिक और राजनीतिक फायदे के लिए 1905 में बंगाल का पहला बंटवारा किया. इस फैसले का देशभर में जबरदस्त विरोध हुआ. जनता के दबाव के चलते 1911 में अंग्रेजों को यह बंटवारा वापस लेना पड़ा और बंगाल फिर एक हो गया.

1947 का विभाजन और नाम का असली कारण

असल बदलाव 1947 में भारत की आजादी के समय आया. देश के बंटवारे के साथ ही बंगाल भी दो हिस्सों में बांटा गया. जिस हिस्से में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, वह पूर्वी बंगाल कहलाया और पाकिस्तान के साथ चला गया. वहीं, जहां हिंदू आबादी अधिक थी, वह हिस्सा भारत में रहा. चूंकि यह हिस्सा पुराने अविभाजित बंगाल के पश्चिम में था, इसलिए इसका नाम पश्चिम बंगाल पड़ा.

पूर्वी बंगाल से बांग्लादेश तक

1947 के बाद पूर्वी बंगाल को पूर्वी पाकिस्तान कहा गया, लेकिन भौगोलिक दूरी और राजनीतिक भेदभाव के कारण वहां असंतोष बढ़ता गया. आखिरकार 1971 में युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बना, जिसे आज हम बांग्लादेश के नाम से जानते हैं. इसके बाद भी भारत में मौजूद बंगाल का पश्चिमी हिस्सा अपनी पहचान के साथ पश्चिम बंगाल कहलाता रहा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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