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क्यों चौकोर ही होते हैं हर देश के झंडे, नेपाल क्यों है इन सबसे अलग? जानें इसका इतिहास

जब बात नेपाल की आती है तो यह परंपरा पूरी तरह बदल जाती है. नेपाल दुनिया का इकलौता देश है, जिसका झंडा न तो आयताकार है, न ही चौकोर. दो त्रिकोण से बना नेपाल का झंडा दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है.

दुनिया के लगभग हर देश का राष्ट्रीय ध्वज आयताकार का होता है. भारत, अमेरिका, जापान, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, ब्राजील जैसे लगभग सभी देशों के झंडों का आकार एक जैसा दिखाई देता है, लेकिन जब बात नेपाल की आती है तो यह परंपरा पूरी तरह बदल जाती है. नेपाल दुनिया का इकलौता देश है, जिसका राष्ट्रीय ध्वज न तो आयताकार है, न ही चौकोर. दो त्रिकोण से बना नेपाल का झंडा पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ज्यादातर देशों के झंडे चौकोर क्यों होते हैं और नेपाल इन सबसे अलग क्यों है और इसका इतिहास क्या है. 

आयताकार झंडा बनने की शुरुआत कैसे हुई? 

राष्ट्रीय ध्वज की शुरुआत केवल किसी देश की पहचान के लिए नहीं हुई थी. प्राचीन समय में झंडों का इस्तेमाल युद्ध के मैदानों और समुद्री यात्राओं के दौरान किया जाता था. सैनिकों और नाविकों को दूर से अपने दल की पहचान करने के लिए ऐसे झंडों की जरूरत होती थी, जिन्हें हवा में आसानी से देखा जा सके. आयताकार आकार इस काम के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता गया. यह हवा में आसानी से लहराता है, डंडे पर मजबूती से लगाया जा सकता है और दूर से भी साफ दिखाई देता है. यही कारण रहा कि समय के साथ ज्यादातर देशों ने इस आकार को अपनाया और बाद में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानक बन गया. 

समुद्री यात्राओं और युद्ध ने बनाया मानक 

इतिहासकारों के अनुसार समुद्री व्यापार बढ़ाने के साथ झंडों का महत्व भी बढ़ गया, जहाजों पर लगा झंडा दूर से किसी देश या जहाज की पहचान बताते थे. आयताकार झंडा तेज हवा में साफ दिखाई देते थे और जल्दी उलझते भी नहीं थे. यही वजह है कि नौसेना और व्यापारिक जहाजों में इस आकार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ. बाद में जब नए देश का गठन हुआ तो उन्होंने भी इसी परंपरा को अपनाया. 

नेपाल ने क्यों नहीं अपनाया आयताकार झंडा? 

नेपाल का इतिहास बाकी देशों से लग रहा है. नेपाल कभी किसी औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं रहा, इसलिए उस पर यूरोपीय झंडों का प्रभाव नहीं पड़ा. नेपाल ने अपनी अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखा और उसी के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया. नेपाल का वर्तमान का राष्ट्रीय ध्वज वर्ष 1962 में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया. लेकिन इसका मूल स्वरूप सदियों पुराना माना जाता है. पहले भी नेपाल के अलग-अलग राजवंश त्रिकोणीय ध्वज का इस्तेमाल करते थे. नए संविधान के लागू होने के साथ झंडे को आधुनिक स्वरूप दिया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना और पारंपरिक पहचान को बरकरार रखा गया. 

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नेपाल के झंडे में छिपे हैं कई प्रतीक 

नेपाल का झंडा दो त्रिकोण से मिलकर बना है. ऊपरी त्रिकोण में चंद्रमा और निचले त्रिकोण में सूर्य का प्रतीक बनाया गया है. इन दोनों प्रतीक नेपाल की स्थिरता और लंबे अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जब तक सूर्य और चंद्रमा रहेंगे तब तक नेपाल भी अपनी पहचान बनाए रखेगा. झंडे के दोनों त्रिकोण को हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का प्रतीक भी माना जाता है. वहीं कई व्याख्या में इसे इन्हें नेपाल के दो प्रमुख धर्म हिंदू और बौद्ध परंपरा से भी जोड़ा जाता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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