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देश में प्रीमियम ट्रेनें भी क्यों चल रहीं लेट, क्या सिर्फ कोहरा है इसके पीछे की वजह?

Premium Trains Running Late: प्रीमियम ट्रेनें लेट होने के पीछे कोहरा बड़ी वजह है, लेकिन पूरी कहानी यहीं खत्म नहीं होती. ट्रैक, तकनीक और ट्रैफिक से जुड़ी चुनौतियां मिलकर रफ्तार पर ब्रेक लगा रही हैं.

वंदे भारत, राजधानी और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों का नाम सुनते ही यात्रियों के मन में रफ्तार और समय की पाबंदी की तस्वीर उभरती है, लेकिन जब यही ट्रेनें घंटों नहीं, बल्कि 6 से 12 घंटे तक लेट पहुंचने लगें, तो सवाल उठना लाजमी है. क्या इसके पीछे सिर्फ उत्तर भारत का घना कोहरा जिम्मेदार है या फिर भारतीय रेलवे की व्यवस्था में छिपी कुछ और बड़ी वजहें भी हैं? आइए जानें.

प्रीमियम ट्रेनें और समय की चुनौती

भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनें आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं और तेज गति के लिए जानी जाती हैं. इसके बावजूद हाल के महीनों में उत्तर भारत के कई रूटों पर इन ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा से गुजरने वाली वंदे भारत, राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें अक्सर देरी का शिकार हो रही हैं. यह समस्या सिर्फ किसी एक दिन या एक रूट तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम से जुड़ी हुई नजर आती है.

कोहरा सबसे बड़ा लेकिन अकेला कारण नहीं

सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत में पड़ने वाला घना कोहरा रेलवे परिचालन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. दृश्यता कई बार 50 मीटर से भी कम रह जाती है, जिससे लोको पायलट को सिग्नल देखने में कठिनाई होती है. सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की रफ्तार कम करनी पड़ती है और कई बार ट्रेन को स्टेशन पर रोकना भी जरूरी हो जाता है. यही कारण है कि प्रीमियम ट्रेनें भी निर्धारित समय से काफी पीछे चलने लगती हैं. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि कोहरा अहम वजह है, लेकिन अकेली वजह नहीं.

ट्रैक रखरखाव और बुनियादी ढांचे की बाधाएं

रेलवे ट्रैक की नियमित मरम्मत और रखरखाव सुरक्षा के लिए जरूरी होता है, लेकिन यही काम कई बार ट्रेनों की समय-सारिणी बिगाड़ देता है. कई रूटों पर ट्रैक सुधार कार्य के चलते ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाता है या कुछ समय के लिए रोका जाता है. इसका असर सीधा प्रीमियम ट्रेनों की गति और समय पर पड़ता है. व्यस्त रूटों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

तकनीकी खराबी भी बन रही देरी की वजह

आधुनिक सिग्नल सिस्टम और इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के बावजूद तकनीकी खराबियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. सिग्नल फेल होना, ओवरहेड लाइन में दिक्कत या इंजन से जुड़ी समस्याएं भी ट्रेन लेट होने का कारण बनती हैं. चूंकि प्रीमियम ट्रेनें सीमित समय में लंबी दूरी तय करती हैं, इसलिए थोड़ी सी तकनीकी रुकावट भी कई घंटों की देरी में बदल जाती है.

व्यस्त रूट और ट्रेनों की प्राथमिकता

भारतीय रेलवे के कई मुख्य रूट पहले से ही अत्यधिक व्यस्त हैं. एक ट्रेन के लेट होने का असर पीछे चल रही कई अन्य ट्रेनों पर पड़ता है. इसके अलावा कुछ परिस्थितियों में मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे यात्री ट्रेनें, यहां तक कि प्रीमियम ट्रेनें भी, साइड में खड़ी करनी पड़ती हैं. यह चेन रिएक्शन पूरे नेटवर्क को प्रभावित करता है.

मानव संसाधन की कमी का असर

त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ की जरूरत होती है. कई बार टीटीई, गार्ड और अन्य कर्मचारियों की कमी के कारण ट्रेनें समय पर रवाना नहीं हो पातीं. यह समस्या भी देरी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है.

रेलवे की तैयारी और प्रयास

भारतीय रेलवे कोहरे से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. वंदे भारत, शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेक तैयार रखे जा रहे हैं, ताकि किसी तकनीकी या परिचालन समस्या की स्थिति में सेवाएं प्रभावित न हों. इसके साथ ही सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए मौसम साफ होने तक गति नियंत्रण जैसे कदम उठाए जाते हैं. रेलवे का कहना है कि यात्रियों की जान की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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