मैच के दौरान दर्शक को बॉल से लग जाए चोट तो कौन लेता है इलाज की जिम्मेदारी, क्या है नियम?
भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है. कई बार ऐसा होता है कि स्टेडियम में दर्शकों को मैच के दौरान चोट लग जाती है. इस स्थिति में उनके इलाज की जिम्मेदारी कौन लेता है चलिए जानते हैं.

क्रिकेट मैच के दौरान कई बार ऐसा होता है कि जब बैट्समैन लंबे छक्के, चौके लगाते हैं तो स्टेडियम में बैठे दर्शक को बॉल लग जाती है. अगर क्रिकेट के दौरान स्टेडियम में बैठे दर्शक को गेंद या किसी अन्य कारण से चोट लग जाए, तो उसके इलाज की जिम्मेदारी किसकी होती है? चलिए जानते हैं क्या है नियम.
कैसे होता है घायल का इलाज
बता दें कि स्टेडियम में दर्शकों की सुरक्षा के लिए कई तरह के प्रोटोकॉल मौजूद हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अन्य खेल संगठन जैसे कि IPL फ्रेंचाइजी स्टेडियम में मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करते हैं. अगर कोई दर्शक चोटिल होता है, तो स्टेडियम में मौजूद मेडिकल टीमें तुरंत प्राथमिक उपचार प्रदान करती हैं. हर बड़े स्टेडियम में आपातकालीन मेडिकल यूनिट, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और एम्बुलेंस की सुविधा होती है. ये टीमें किसी भी तरह की चोट, चाहे वह गेंद लगने से हो या अन्य कारणों से, तुरंत उपचार शुरू करती हैं.
इलाज का खर्च कौन उठाता है?
अगर चोट मामूली है, जैसे कि हल्की खरोंच या सूजन, तो स्टेडियम में मौजूद मेडिकल स्टाफ इसे मुफ्त में संभाल लेता है. लेकिन अगर चोट गंभीर है, जैसे कि सिर में चोट, हड्डी टूटना और अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है, तो स्थिति जटिल हो सकती है. अगर भारत में किसी दर्शक को चोट लगती है तो बीसीसीआई के मेडिकल अधिकारी इसमें मरीज की मदद करते हैं. हालांकि, ऐसी स्थिति बहुत कम ही होती है कि किसी दर्शक को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े. मामूली चोटें स्टेडियम में मौजूद मेडिकल स्टाफ ही ठीक कर देते हैं.
दर्शकों की सुरक्षा के लिए अहम उपाय
हालांकि, आयोजक दर्शकों को सतर्क रहने की सलाह भी देते हैं. स्टेडियम में लाउडस्पीकर और स्क्रीन के जरिए बार-बार घोषणाएं की जाती है. कई स्टेडियम में विशेष जाल लगाए जाते हैं जो गेंद को सीधा दर्शकों तक पहुंचने से रोकता है. इसके अलावा स्टेडियम में मौजूद सुरक्षा कर्मियों को खास ट्रेनिंग दी जाती है जिससे इमरजेंसी के समय वो दर्शकों की सही तरीके से सहायता कर सकें.
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