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परमाणु बम बनाने के लिए भारत कहां से मंगाता है यूरेनियम, जानें कौन है दोस्त?

परमाणु ऊर्जा हर देश के लिए जरूरी है, लेकिन इससे हमेशा परमाणु बम बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है. चलिए जानें कि भारत परमाणु बम बनाने के लिए कहां से यूरेनियम मंगवाता है.

जब बात परमाणु हथियारों और सैन्य मिसाइलों की आती है तो पूरी दुनिया की नजर भारत की सैन्य ताकत पर टिक जाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि देश को परमाणु संपन्न बनाने वाला सबसे जरूरी ईंधन यानि यूरेनियम भारत कहां से लाता है? आमतौर पर लोग मानते हैं कि भारत इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भर है, लेकिन हकीकत यह नहीं है. रक्षा और सामरिक मामलों में भारत आत्मनिर्भर है. देश की सुरक्षा से जुड़े परमाणु बमों को तैयार करने के लिए भारत किसी भी बाहरी मुल्क से यूरेनियम नहीं खरीदता है, बल्कि अपनी ही जमीन से निकले हुए ईंधन का इस्तेमाल करता है.

हथियार बनाने के लिए भारत के पास स्वदेशी नेटवर्क

सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए भारत पूरी तरह से अपने घरेलू संसाधनों पर भरोसा रखता है. इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय नियम और संधियां हैं, जो कि बहुत सख्त होती हैं. भारत में परमाणु बम बनाने के लिए जिस खास ग्रेड के यूरेनियम की जरूरत होती है, उसका खनन देश के अंदर ही किया जाता है. सरकारी कंपनी यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया इस जिम्मेदारी को संभालता है. झारखंड के जादूगोड़ा और तुरामडीह के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के तुम्मलपल्ली इलाके की खदानों से यह कीमती खनिज निकाला जाता है. देश के अंदर से निकले इसी यूरेनियम को प्रोसेस करके सेना के लिए परमाणु हथियार तैयार किए जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय नियमों का पहरा

परमाणु ईंधन की दुनिया में एक बहुत ही सख्त कानून काम करता है, जिसको समझना बेहद जरूरी होता है. दरअसल भारत यूरेनियम को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर इस्तेमाल करता है. पहला हिस्सा सैन्य हथियारों के लिए है और दूसरा नागरिक कार्यों जैसे बिजली बनाने के लिए. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की गाइडलाइंस के अनुसार, भारत विदेशों से जो भी यूरेनियम खरीदता है, उसका इस्तेमाल सिर्फ बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए किया जाता है. इन विदेशी ईंधनों की कड़ी निगरानी होती है, ताकि इनका इस्तेमाल कभी भी परमाणु बम बनाने में न किया जा सके.

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बिजली संकट दूर करने में भारत के संकटमोचन कौन?

भले ही भारत बम बनाने के लिए विदेशी यूरेनियम का इस्तेमाल न करता हो, लेकिन देश के करोड़ों घरों को रोशन करने वाले परमाणु बिजलीघरों के लिए वह कई मित्र देश से बड़े पैमाने पर आयात करता है. इस मामले में मध्य एशिया का देश कजाकिस्तान भारत का सबसे भरोसेमंद बिजनेस पार्टनर बनकर उभरा है. वहां की सरकारी कंपनी कजाटोमप्रोम भारत को सबसे ज्यादा यूरेनियम की सप्लाई करती है. इसके अलावा उत्तरी अमेरिकी देश कनाडा की मशहूर कंपनी कैमेको के साथ भी भारत का एक लंबा और मजबूत समझौता है. ये दोनों देश मिलकर भारत के नागरिक परमाणु रिएक्टरों की ईंधन की भूख को शांत करते हैं. 

ईंधन ही नहीं तकनीक देने में भी मॉस्को आगे

जब भी संकट या रणनीतिक साझेदारी की बात आती है, तो रूस का नाम सबसे ऊपर आता है. परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी रूस भारत का एक बेहद पुराना, परखा हुआ और अटूट साथी है. रूस केवल यूरेनियम ईंधन की सप्लाई ही नहीं करता, बल्कि भारत को परमाणु तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता आया है. तमिलनाडु में बने मशहूर कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की विशाल इमारत और उसके रिएक्टर रूस के तकनीकी सहयोग और ईंधन की बदौलत ही आज देश को हजारों मेगावाट की बिजली मिल रही है.

थोरियम से चमकेगा भविष्य

प्राकृतिक रूप से भारत के पास यूरेनियम का भंडार ज्यादा नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने भविष्य की एक ऐसी चाबी ढूंढ निकाली है, जो देश को हमेशा के लिए टेंशन फ्री कर देगी. भारत के पास थोरियम का दुनिया का सबसे बड़ा खजाना मौजूद है. हमारे वैज्ञानिकों ने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के तहत कलपक्कम में एक खास प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार करने में एतिहासिक सफलता पाई है. यह जादुई तकनीक आने वाले समय में थोरियम को परमाणु ईंधन में बदल देगी. इसके पूरी तरह से एक्टिव होते ही भारत अगले 500 से 700 सालों के लिए बिजली और परमाणु ऊर्जा के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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