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Debris Rights: अवैध निर्माण टूटने के बाद निकले मलबे पर किसका हक, इससे कौन कर सकता है कमाई?

Debris Rights: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब किसी गैरकानूनी ढांचे को गिराया जाता है तो उसके मलबे पर किसका अधिकार होता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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  • अवैध निर्माण के मलबे पर नगर निकाय का अधिकार होता है।
  • मालिक को विध्वंस खर्च देना होगा, निकाय नीलामी से कमाते हैं।
  • स्क्रैप डीलर, रीसाइक्लिंग प्लांट मलबे का सदुपयोग करते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने विध्वंस से पहले 15 दिन नोटिस अनिवार्य किया।

Debris Rights: जब किसी गैर-कानूनी ढांचे को गिराया जाता है तो अक्सर ध्यान उस कार्रवाई पर ही होता है. लेकिन उसके बाद एक बड़ा सवाल उठता है. पीछे बचे मलबे का मालिक कौन है और उससे कौन फायदा उठा सकता है? इसका जवाब म्यूनिसिपल नियमों और कंस्ट्रक्शन वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों में मिलता है. ज्यादातर मामलों में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन या फिर स्थानीय विकास प्राधिकरण गिराने के दौरान निकले मलबे का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं और उसे हटाने, नीलाम करने या फिर रीसायकल करने का काम देखते हैं. 

म्युनिसिपल अथॉरिटीज मलबे पर कब्जा करती है 

गिराने की कार्रवाई के बाद कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन कचरे को हटाने की जिम्मेदारी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, डेवलपमेंट अथॉरिटी या फिर किसी दूसरी स्थानीय गवर्निंग बॉडी की होती है. क्योंकि मलबा सड़कों, सार्वजनिक जगहों और ड्रेनेज सिस्टम को रोक सकता है. इस वजह से अथॉरिटीज लोगों की सुरक्षा और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए तुरंत उस पर कब्जा कर लेती हैं. 

प्रॉपर्टी के मालिक को पहले गिराने का खर्च चुकाना होगा 

गैरकानूनी निर्माण के लिए जिम्मेदार व्यक्ति गिराने के बाद अपने आप मलबे पर अपना हक नहीं जता सकता.  बचे हुए मटीरियल पर कोई भी अधिकार मांगने से पहले मालिक को आमतौर पर प्रशासन को गिराने का खर्च, मलबा हटाने का चार्ज, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और ऑपरेशन के दौरान हुए दूसरे संबंधित खर्च चुकाने  होते हैं. 

म्यूनिसिपल बॉडीज मलबे से कैसे कमाई करती हैं?

स्थानीय अथॉरिटीज गिराने से निकले कचरे से कई तरह से कमाई कर सकती हैं. पहला वे नियम तोड़ने वाले से गिराने और साफ-सफाई का खर्च वसूलती हैं. दूसरा बड़ी कमर्शियल इमारत या फिर गैर कानूनी कॉलोनी के मामलों में अथॉरिटीज मलबे की सार्वजनिक नीलामी कर सकती हैं. स्क्रैप डीलर और कांट्रैक्टर इन नीलामियों में हिस्सा लेते हैं. इससे सरकार के लिए कमाई का एक सीधा जरिया बनता है. 

स्क्रैप डीलर अक्सर सबसे ज्यादा मुनाफा कमाते हैं 

जो कॉन्ट्रैक्ट और स्क्रैप डीलर गिराने से निकला कचरा खरीदते हैं वे कीमती मटीरिल को अलग करके अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं. स्क्रैप मार्केट में लोहे के गर्डर, स्टील के बीम, रिइंफोर्समेंट बार और धातु के दूसरे हिस्सों की अच्छी खासी कीमत मिलती है. कई मामलों में इस्तेमाल लायक ईंट, टाइल, मार्बल स्लैब और ग्रेनाइट के टुकड़ों को भी बचा लिया जाता है. इसके बाद उन्हें कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में दोबारा इस्तेमाल के लिए बेचा जाता है.

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रीसाइकलिंग प्लांट कचरे को नए प्रोडक्ट में बदलते हैं 

आधुनिक कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन रीसाइकलिंग प्लांट ने मलबे को एक कीमती संसाधन में बदल दिया है. कंक्रीट के मलबे को क्रश करके एग्रीगेट बनाए जाते हैं जिनका इस्तेमाल सड़क बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में होता है. धूल और कंक्रीट पाउडर को प्रोसेस करके पर्यावरण के अनुकूल प्रोडक्ट जैसे पेवर ब्लॉक, इंटरलॉकिंग टाइल और रीसायकल की गई ईंट बनाई जाती हैं. 

गिरने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन 

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण को गिराने के मामले में प्रक्रिया से जुड़े सुरक्षा उपायों पर जोर दिया है. हाल की कुछ गाइडलाइंस के मुताबिक अधिकारियों को आमतौर पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई करने से पहले 15 दिन का नोटिस देना होता है. इस समय में प्रॉपर्टी के मालिक अपना निजी सामान, कीमती फिक्सर, लोहे के गेट, खिड़कियां और दोबारा इस्तेमाल होने लायक चीजें हटा सकते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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