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US Tariffs: अब किस देश पर है सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ, भारत किस नंबर पर?

US Tariffs: अमेरिका की नई टैरिफ नीति में भारत अब भी ऊंचे शुल्क वाले देशों में शामिल है, हालांकि राहत की हल्की झलक जरूर दिखी है. आइए जानें कि किस देश पर सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ है.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका जब किसी देश पर टैरिफ बढ़ाता है, तो उसकी गूंज सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आम लोगों की जेब तक महसूस होती है. साल 2025 में अमेरिका ने कई देशों पर आयात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है. अब सवाल उठ रहा है कि इस समय सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ किस देश पर है और भारत इस लिस्ट में किस पायदान पर खड़ा है. 

अमेरिकी टैरिफ नीति क्या है और क्यों चर्चा में है?

अमेरिका ने साल 2025 में एक नई टैरिफ नीति लागू की, जिसके तहत लगभग सभी देशों पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ तय किया गया. इसका मतलब यह है कि कोई भी देश अमेरिका को जो सामान निर्यात करता है, उस पर कम से कम 10 प्रतिशत शुल्क जरूर लगेगा. हालांकि, कुछ देशों पर यह शुल्क इससे कहीं ज्यादा है. यह दरें अमेरिका और संबंधित देश के बीच व्यापार घाटे, व्यापार नियमों और द्विपक्षीय रिश्तों को देखते हुए तय की गई हैं.

किन देशों पर भारत से कम टैरिफ?

अगर भारत की तुलना उन देशों से की जाए, जिन पर अमेरिका कम टैरिफ लगाता है, तो तस्वीर साफ हो जाती है. यूरोपीय संघ, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे विकसित देशों पर करीब 15 प्रतिशत टैरिफ है. यूनाइटेड किंगडम पर यह दर सिर्फ 10 प्रतिशत रखी गई है. भारत पर इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, जबकि पाकिस्तान, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया पर करीब 19 प्रतिशत टैरिफ लागू है।

भारत से ज्यादा टैरिफ झेलने वाले देश

भारत से भी ज्यादा अमेरिकी टैरिफ झेलने वाले देशों में ब्राजील सबसे ऊपर है, जिस पर करीब 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया गया है. चीन पर 37 प्रतिशत, लाओस और म्यांमार पर 40 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका पर 30 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया पर लगभग 25 प्रतिशत टैरिफ लागू है. इन आंकड़ों से साफ है कि अमेरिका कुछ देशों के साथ व्यापार में सख्त रुख अपनाए हुए है.

भारत किस नंबर पर है?

अब अगर कम टैरिफ वाले देशों की सूची देखी जाए, तो इस लिस्ट में अब भारत का नंबर टॉप देशों से नीचे आ चुका है. अब 18 प्रतिशत टैरिफ का मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाला सामान वहां पहले के मुकाबले सस्ता पड़ेगा. हालांकि, पहले की तुलना में टैरिफ घटाया जाना यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत और संतुलन बनाने की कोशिश जारी है.

अमेरिका टैरिफ क्यों बढ़ाता है?

अमेरिका अक्सर घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए टैरिफ बढ़ाता है. इसके अलावा, यह कदम व्यापारिक दबाव बनाने और दूसरे देशों को अपनी नीतियां बदलने के लिए मजबूर करने के मकसद से भी उठाया जाता है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में ज्यादा टैरिफ से वैश्विक व्यापार महंगा होता है और देशों के बीच तनाव भी बढ़ सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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