IMF के पास इतना पैसा कहां से आता है, कहां से होती है कमाई?
IMF Funding: आईएमएफ आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे देशों को लोन देता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इसके पास पैसा आता कहां से है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

- आईएमएफ को मुख्य रूप से सदस्य देशों के कोटे से फंड मिलता है।
- अतिरिक्त उधार लेने की व्यवस्था, द्विपक्षीय समझौते वित्तीय मदद देते हैं।
- आईएमएफ ब्याज, फीस, निवेश से आय अर्जित कर खर्च चलाता है।
IMF Funding: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड गंभीर आर्थिक और भुगतान संतुलन की मुश्किलों का सामना कर रहे देशों को लोन देकर ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में बड़ी भूमिका निभाता है. लेकिन इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के पास देशों को लोन देने के लिए इतनी बड़ी रकम आखिर आती कहां से है?
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड को मुख्य रूप से अपने 191 सदस्य देशों द्वारा दिए गए कोटे से फंड मिलता है. इसके पास अतिरिक्त उधार लेने की व्यवस्था भी है जिसे बड़े फाइनेंशियल संकट के समय एक्टिवेट किया जा सकता है. इसकी कमाई मुख्य रूप से लोन पर लिए जाने वाले ब्याज और फीस के साथ-साथ निवेश में मिलने वाले रिटर्न से होती है.
सदस्य देश मुख्य फंड देते हैं
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के फाइनेंशियल रिसोर्स का सबसे बड़ा स्रोत सदस्य कोटा है. जब भी कोई देश आईएमएफ में शामिल होता है तो उसे उसकी अर्थव्यवस्था के आकार और विशेषताओं के आधार पर एक कोटा दिया जाता है.
सदस्य देश आईएमएफ को यह कोटा देते हैं. किसी देश के कोटे का आकार संस्था के अंदर उसकी सापेक्ष स्थिति को भी दर्शाता है. उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का कोटा सबसे बड़ा है.
इस वजह से आईएमएफ कई मायनों में देश के लिए एक फाइनेंशियल कोऑपरेटिव की तरह काम करता है. यह रिसोर्स को इकट्ठा करते हैं और बाद में फाइनेंशियल मुश्किलों का सामना कर रहे सदस्यों को मदद देने के लिए उनका इस्तेमाल किया जा सकता है.

न्यू अरेंजमेंट टू बॉरो क्या है?
सदस्य कोटा आईएमएफ का मुख्य फाइनेंशियल रिसोर्स है लेकिन बड़े ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के समय यह हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकते. ऐसे हालातों में आईएमएफ न्यू अरेंजमेंट टू बॉरो के जरिए फंड हासिल कर सकता है. इस व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से मजबूत सदस्य देश और संस्थाएं आईएमएफ की लेनदेन की क्षमता को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त रिसोर्स उपलब्ध कराते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देश आईएमएफ की उधार लेने की व्यवस्था से जुड़ी बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल हैं.
द्विपक्षीय उधार एक और सुरक्षा कवच है
आईएमएफ के अलग-अलग सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय उधर समझौते भी हैं. जब आईएमएफ को अतिरिक्त रिसोर्स की जरूरत होती है तो ये समझौते फाइनेंशियल सपोर्ट की एक और परत देते हैं.
ऐसी व्यवस्था को असाधारण फाइनेंशियल दबाव के समय एक्टिवेट किया जा सकता है. इससे आईएमएफ को सदस्य कोटा और एनएबी के अलावा फंड का एक और स्रोत मिलता है. ये सभी मिलकर आईएमएफ को लोन देने की बड़ी क्षमता देते हैं. इसका अनुमान लगभग एक ट्रिलियन डॉलर है.
आईएमएफ अपनी कमाई कहां से करता है?
आईएमएफ की कमाई मुख्य रूप से उन देशों से होती है जो उससे पैसा उधार लेते हैं. जब आईएमएफ भुगतान संतुलन के संकट का सामना कर रहे देशों को लोन देता है तो वह ब्याज और सर्विस फीस लेता है. इस वजह से आर्थिक मदद पाने वाले देश न सिर्फ मूल राशि चुके हैं बल्कि लागू शुल्क भी देते हैं. आईएमएफ गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे देश पर अतिरिक्त सरचार्ज भी लगा सकता है.

क्या आईएमएफ अपना पैसा निवेश करता है?
निवेश से होने वाली इनकम आईएमएफ की कमाई का एक और जरिया है. यह संस्था अपने अतिरिक्त फंड और सोने के भंडार के कुछ हिस्से को बेचकर मिली रकम को फिक्स्ड इनकम बॉन्ड और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों जैसी संपत्तियों में निवेश करती हैं. इन निवेशों से मिलने वाला रिटर्न आईएमएफ की नेट इनकम में योगदान देता है.
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आईएमएफ अपने काम-काज के लिए फंड कैसे जुटाता है?
प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए नियमित सालाना योगदान पर निर्भर रहने वाले संगठनों के उलट आईएमएफ अपनी लोन देने और निवेश की गतिविधि से कमाई करता है. इसकी कमाई से स्टाफ की सैलरी, रिसर्च और संस्था के दूसरे काम काज जैसे खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है.
आसान शब्दों में कहें तो आईएमएफ का वित्तीय सिस्टम तीन मुख्य स्तरों पर काम करता है. सदस्य देश कोटे के जरिए मुख्य संस्थान मौजूद कराते हैं, उधार लेने की व्यवस्था संकट के समय अतिरिक्त वित्तीय मजबूती देती है और ब्याज, फीस और निवेश से होने वाला रिटर्न कमाई का जरिया बनता है.
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