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Mahabharata: अब कहां हैं वे 5 गांव, जो भगवान कृष्ण ने महाभारत काल में मांगे थे? जान लें सच

Mahabharata: भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत काल में दुर्योधन से पांच गांव मांगे थे. आइए जानते हैं कि कौन से हैं वे गांव

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  • कुरुक्षेत्र युद्ध से पूर्व कृष्ण ने पांडवों के लिए पांच गांव मांगे.
  • आज इंद्रप्रस्थ, पानप्रस्थ जैसे गांव प्रमुख शहरों में बदले हैं.
  • मूल महाभारत में गांव के नाम भिन्न, दुर्योधन ने ठुकराया प्रस्ताव.
  • पुरातात्विक खुदाई में महाभारतकालीन साक्ष्य मिले, पांडवों की रणनीति थी.

Mahabharata: कुरुक्षेत्र युद्ध से पहले भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की तरफ से शांति दूत बनकर हस्तिनापुर जाकर संघर्ष को रोकने के लिए एक आखिरी कोशिश की थी. कुरू राज्य का आधा हिस्सा मांगने के बजाय पांडवों ने सिर्फ पांच गांव मांगे ताकि वे बिना युद्ध के शांति से रह सकें. वक्त के साथ यह पांच गांव दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों के कई बड़े शहरों से जुड़ गए.

आज के शहरों से जुड़े पांच गांव 

लोकप्रिय पौराणिक परंपराओं के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण द्वारा मांगे गए पांच गांव आज समृद्ध शहरों के रूप में विकसित हो चुके हैं. इंद्रप्रस्थ की पहचान आज की दिल्ली से की जाती है. यहां माना जाता है कि प्राचीन पुराना किला पांडवों की राजधानी थी. पानप्रस्थ जिसे पांडुप्रस्थ भी कहा जाता है हरियाणा के आधुनिक पानीपत से जुड़ा हुआ है. इसी के साथ स्वर्णप्रस्थ आज सोनीपत बन चुका है. व्याघ्रप्रस्थ उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से जुड़ा है और तिलप्रस्थ की पहचान हरियाणा के फरीदाबाद जिले के तिलपत से की जाती है. कुछ पौराणिक परंपराएं और स्थानीय मान्यताएं गाजियाबाद के गजप्रस्थ को भी पांचवें गांव के रूप में बताती हैं.

मूल महाभारत क्या कहती है? 

हालांकि ऊपर बताए गए नाम लोकप्रिय परंपरा में अपनाए जाते हैं लेकिन महाभारत के उद्योग पर्व का मूल संस्कृत पाठ एक अलग ही सूची देता है. भगवान श्री कृष्ण को हस्तिनापुर भेजने से पहले महाराज युधिष्ठिर ने गांव के नाम अविस्थल, वृकस्थल, माकंदी, वारणावत, कोई भी एक दूसरा गांव बताए थे. मूल पाठ के मुताबिक वारणावत की पहचान उत्तर प्रदेश के वर्तमान बरनावा से की जाती है. 

महाभारत में बताया गया है कि पांडवों के अपनी मांग को घटाकर सिर्फ पांच गांव करने के बावजूद भी दुर्योधन ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था. अहंकार में अंधे और सत्ता में हिस्सेदारी ना देने के पक्के इरादे के साथ दुर्योधन ने यह ऐलान किया कि वह बिना युद्ध के पांडवों को सुई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं देगा. 

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इन जगहों पर हुई पुरातात्विक खुदाई 

मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन गांव से जुड़ी कई जगहों पर खुदाई की है. दिल्ली के पुराने किले में हुई खुदाई में पेंटेड ग्रे वेयर मिट्टी के बर्तन मिले हैं. इन्हें पुरातत्वविद महाभारत काल का मानते हैं. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बरनावा में एक बड़े टीले को लाक्षागृह के अवशेष के रूप में माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यह महल पांडवों को जिंदा जलाने के लिए बनाया गया था. 

पांडवों ने सिर्फ पांच गांव क्यों मांगे थे?

ऐसा कहा जाता है कि महाराज युधिष्ठिर की मांग सिर्फ जमीन पाने के लिए नहीं थी बल्कि यह एक सोच समझ कर की गई रणनीतिक चाल थी. ये गांव यमुना नदी के उपजाऊ मैदानी इलाकों में थे, जहां खेती अच्छी हो सकती थी और पानी आसानी से मिल सकता था. इन जगहों पर कब्जा होने से कुरू राज्य के चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बन जाता. जिस वजह से पांडव हस्तिनापुर को सीधे चुनौती दिए बिना सुरक्षित रह सकते थे.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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