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First EVM Election: देश में पहली बार EVM से कब हुई थी वोटिंग? 99% लोग देते हैं गलत जवाब

First EVM Election: देश में इलेक्शन के दौरान EVM का इस्तेमाल कई जमाने से हो रहा है. आइए जानते हैं कि पहली बार इसका इस्तेमाल कब हुआ था.

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  • 2004 के लोकसभा चुनाव में पहली बार देश भर में EVM का इस्तेमाल।

First EVM Election: भारत में हर बड़े चुनाव के बाद भारतीय चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बारे में चर्चाएं फिर से सुर्खियों में आ जाती हैं. हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद लोगों ने एक बार फिर से देश में EVM के इतिहास पर बहस शुरू कर दी है.  आइए जानते हैं कि भारत में पहली बार EVM का इस्तेमाल कब हुआ था. 

भारत में EVM का पहला इस्तेमाल 

भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल सबसे पहले मई 1982 में केरल के परावुर विधानसभा क्षेत्र में हुए एक उपचुनाव के दौरान किया गया था. हालांकि यह पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था. उस विधानसभा क्षेत्र के कुल 123 पोलिंग बूथ में से 50 बूथों पर EVM का इस्तेमाल सिर्फ एक प्रयोग के तौर पर किया गया था. 

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनाव 

1982 का यह प्रयोग जल्द ही विवादों में घिर गया. चुनाव के बाद हारे हुए उम्मीदवार ए.सी.जोस ने कोर्ट में EVM के इस्तेमाल को चुनौती दी. 1984 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया. इसकी वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि कानूनी प्रावधानों की कमी थी. उस वक्त जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में सिर्फ बैलट पेपर का जिक्र था और उसमें इलेक्ट्रानिक मशीनों के जरिए वोट डालने की अनुमति देने वाला कोई प्रावधान नहीं था. 

बाद में पारंपरिक बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके फिर से चुनाव करवाया गया. दिलचस्प बात यह है कि जो उम्मीदवार पहले चुनाव हार गया था वह इस दोबारा हुए चुनाव में जीत गया.

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EVM कैसे बनी कानूनी 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को औपचारिक रूप से कानूनी दर्जा देने की दिशा में कदम बढ़ाया. 1988 में संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करते हुए उसमें धारा 61A जोड़ी. इसने चुनावों में EVM को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी. 

1998 में वापसी 

हालांकि EVM पहली बार 1982 में सामने आई थी लेकिन बड़े पैमाने पर उनकी वापसी काफी बाद में हुई. 1998 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में फैली 25 विधानसभा सीटों पर EVM के सफल परीक्षण किए गए. 

पहली बार पूरे राज्य और पूरे देश में इस्तेमाल 

पहला चुनाव जिसमें पूरे राज्य में EVM का इस्तेमाल किया गया वह 1999 का गोवा विधानसभा चुनाव था. इस सफलता के बाद चुनाव आयोग ने तेजी से इनका इस्तेमाल बढ़ाया. आखिरकार पहला लोकसभा चुनाव जो पूरी तरह से  EVM के जरिए सभी 543 सीटों पर कराया गया वह 2004 का आम चुनाव था.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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