US को हर साल कितनी दवाएं भेजता है भारत, यह कितना बड़ा कारोबार?
भारत हर साल अमेरिका को बहुत बड़े पैमाने पर करीब 10 अरब डॉलर की दवाएं भेजता है, जिससे अमेरिका की लगभग 47% जेनेरिक दवाओं की मांग पूरी होती है. आइए इस बारे में विस्तार से समझें.

भारत और अमेरिका के बीच दवाओं का व्यापार भारतीय फार्मा उद्योग की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. भारत हर साल अमेरिका को लगभग 8.73 अरब डॉलर से लेकर 10 अरब डॉलर मूल्य की दवाएं निर्यात करता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कुल वैश्विक फार्मा निर्यात लगभग 25.8 अरब डॉलर का है, जिसमें से अकेले अमेरिकी बाजार को जाने वाले शिपमेंट की हिस्सेदारी 30% से 37% से अधिक बैठती है. यह कारोबार भारत के दवा निर्यात को वैश्विक स्तर पर मजबूती देता है.
अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार में भारत का दबदबा
अमेरिका के जेनेरिक दवा बाजार में भारत की मौजूदगी बेहद गहरी और व्यापक है. अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से करीब 40% से 47% आपूर्ति भारतीय कंपनियों द्वारा की जाती है. यदि अमेरिका में एशियाई निर्यातकों के आंकड़े देखें, तो भारत और चीन मिलकर वहां के जेनेरिक बाजार की लगभग 80% आपूर्ति संभालते हैं, जिसमें अकेले भारत का हिस्सा सबसे बड़ा है.
अमेरिका में भारतीय दवाओं की खपत
अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में भारतीय दवाओं की निर्भरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका में डॉक्टरों द्वारा लिखे जाने वाले हर 10 में से लगभग 4 नुस्खों में भारतीय कंपनियों की बनी दवाएं शामिल होती हैं. अमेरिका में मरीज जिन टैबलेट, सिरप, एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाओं और अन्य तैयार फार्मा फॉर्मूलेशन का नियमित सेवन करते हैं, वे बड़े पैमाने पर भारतीय कारखानों में तैयार होती हैं.
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भारत में US FDA दवा निर्माण संयंत्रों की संख्या
भारतीय दवा उद्योग के पास गुणवत्ता और क्षमता के मामले में एक बड़ी उपलब्धि यह है कि अमेरिका के बाहर दुनिया में सबसे ज्यादा यूएस एफडीए US FDA से स्वीकृत दवा निर्माण संयंत्र भारत में ही हैं. भारत में 600 से अधिक ऐसे फार्मा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट मौजूद हैं, जिन्हें अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक से सीधी मंजूरी मिली हुई है. यह विशाल ढांचा भारतीय कंपनियों को अमेरिकी गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने में मदद करता है.
अमेरिकी आयात में भारत की हिस्सेदारी और प्रमुख कंपनियां
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा फार्मास्युटिकल आयातक है, जिसने 2025 में 213 अरब डॉलर मूल्य के फार्मा उत्पादों का आयात किया था, जिसमें 94.1 अरब डॉलर की केवल दवाएं शामिल थीं. अमेरिका के कुल दवा आयात में अकेले भारत की हिस्सेदारी 15% से अधिक है. सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेज, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज जैसी प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों ने अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग और वितरण इकाइयां स्थापित कर रखी हैं.
भारत बना 'दुनिया का दवाखाना'
अपनी विशाल उत्पादन क्षमता और किफायती लागत के कारण भारत को 'दुनिया का दवाखाना' कहा जाता है. अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा सिंगल मार्केट जरूर है, लेकिन इसके अलावा भी भारतीय दवाएं दुनिया के कई प्रमुख क्षेत्रों में सप्लाई होती हैं. भारत के मुख्य निर्यात बाजारों में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, ब्राजील, रूस, फिलीपींस और केन्या जैसे देश शामिल हैं.

भारतीय फार्मा की मजबूती
भारतीय फार्मा कंपनियों की सफलता का मुख्य कारण उन्नत तकनीक और कम उत्पादन लागत का सही संतुलन है. भारत बेहद कम लागत में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों वाली जेनेरिक और पेटेंट-मुक्त दवाएं तैयार करने में सक्षम है. इससे अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली और वहां के आम नागरिकों को सस्ती और असरदार दवाएं मिलती हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य देखभाल लागत में काफी बचत होती है.
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