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साइप्रस में ग्रीन लाइन बफर जोन क्या है जहां पीएम मोदी ने किया दौरा, आखिर क्यों है यह खास?

What Is Cyprus Green Line Buffer Zone: पीएम मोदी तीन देशों के दौरे पर हैं. इसकी शुरुआत उन्होंने साइप्रस से की है. इस दौरान वे ग्रीन लाइन बफर जोन भी पहुंचे. चलिए जानते हैं कि आखिर यह क्या है.

पीएम मोदी इस वक्त तीन देशों के दौरे पर हैं. उनके दौरे की शुरुआत साइप्रस से हुई है. पीएम बीते दिन साइप्रस पहुंचे. यहां उनका स्वागत खुद राष्ट्रपति निकोस ने किया. पीएम ने सोशल मीडिया पर इस दौरे की तस्वीरें भी शेयर की हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी की यह पहली विदेश यात्रा है. यहां पर मोदी को साइप्रस ने अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया है. पीएम का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्णं माना जा रहा है कि भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्किए ने पाक की मदद की थी, जबकि साइप्रस और तुर्किए के बीच चीजें ठीक नहीं चलती हैं. पीएम के साइप्रस दौरे के दौरान पूरी दुनिया की निगाहें उन पर हैं. 

पीएम मोदी पहुंचे बफर जोन

इस दौरे के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति निकोस के साथ उस जगह भी पहुंचे जहां से तुर्किए और साइप्रस का बॉर्डर सटा हुआ है. पीएम जब साइप्रस की राजधानी निकोशिया के सेंटर में राष्ट्रपति के साथ खड़े थे, इस दौरान उनके बैकग्राउंड में एक झंडा टर्किश रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस (TRNC) का लहरा रहा था. यह वो इलाका है, जिसको साल 1974 में तुर्किए ने जबरन कब्जा कर लिया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय आज भी इसे मान्यता नहीं देता है. इस जगह के बीच में एक ग्रीन लाइन बफर जोन है, जहां पर पीएम मोदी पहुंचे हैं. चलिए जानते हैं कि यह ग्रीन लाइन बफर जोन क्या है और यह इतना खास क्यों है. 

क्या है बफर जोन

साइप्रस ग्रीन लाइन बफर जोन को संयुक्त राष्ट्र बफर जोन भी कहा जाता है. साइप्रस द्वीप पर यह एक अलग क्षेत्र है. यह जगह उत्तरी और दक्षिणी साइप्रस को अलग करती है. यह क्षेत्र 1974 के तुर्किए आक्रमण के बाद बनाया गया था. इसको संयुक्त राष्ट्र शांति सेना द्वारा नियंत्रित किया गया था. यह 180 किलोमीटर लंबा और कुछ क्षेत्रों में कुछ मीटर चौड़ा भी है. वहीं कुछ क्षेत्रों में यह कुछ किलोमीटर चौड़ा है. बफर जोन को दोनों क्षेत्रों के बीच में एक अलग क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया था. 

आम लोगों के लिए प्रतिबंधित है यह जगह 

बफर जोन आम जनता के लिए नहीं है. यह आम जनता के लिए प्रतिबंधित है और किसी को भी वहां पर जाने की अनुमति नहीं है. यहां पर सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों और विशेष अनुमति प्राप्त लोगों को ही जाने की इजाजत है. इस जगह पर अबैन्डंड घर, कारें और यहां तक कि एक हवाई अड्डा भी है, जो 1974 के संघर्ष के बाद से चालू नहीं है. बफर जोन साइप्रस में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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