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क्या होती है ऑर्बिट स्नूपिंग, जिसके जरिए स्पेस में होती है जासूसी; क्या भारत के पास है ये तकनीक?

ऑर्बिट स्नूपिंग से अंतरिक्ष में भी नजर रखी जा सकती है. ऑर्बिट स्नूपिंग जैसी तकनीक भविष्य में सुरक्षा कवच का काम कर सकती है. आइए जानें कि क्या भारत के पास यह तकनीक मौजूद है.

अंतरिक्ष अब सिर्फ खोज और विज्ञान की जगह नहीं रहा, संचार, मौसम, रक्षा और नेविगेशन सब कुछ सैटेलाइट पर निर्भर है. ऐसे में क्या कोई देश अंतरिक्ष में घूम रहे दूसरे सैटेलाइट के बिल्कुल पास जाकर उसकी तस्वीरें ले सकता है? इसे ही कहा जाता है ऑर्बिट स्नूपिंग. हाल ही में भारत की एक निजी कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तस्वीरें लेकर इस क्षमता का प्रदर्शन किया है. क्या यह अंतरिक्ष में नई तरह की जासूसी की शुरुआत है? चलिए जानें.

क्या है ऑर्बिट स्नूपिंग?

ऑर्बिट स्नूपिंग या इन-ऑर्बिट सर्विलांस ऐसी तकनीक है जिसमें एक सैटेलाइट जानबूझकर दूसरे सैटेलाइट या अंतरिक्ष स्टेशन के पास जाकर उसकी गतिविधियों की निगरानी करता है. आम सैटेलाइट पृथ्वी की तस्वीरें लेते हैं, लेकिन इस तकनीक में लक्ष्य अंतरिक्ष में मौजूद दूसरी वस्तुएं होती हैं.

इसका मकसद सिर्फ तस्वीर लेना नहीं, बल्कि यह समझना भी होता है कि दूसरा सैटेलाइट क्या कर रहा है, उसकी बनावट कैसी है और वह किस तरह काम कर रहा है. इसे स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस का हिस्सा माना जाता है, यानी अंतरिक्ष में क्या हो रहा है इसकी सटीक जानकारी रखना.

भारत में हालिया प्रयोग

अहमदाबाद की निजी कंपनी अजिस्टा स्पेस ने 3 फरवरी को एक अहम प्रयोग किया. कंपनी के करीब 80 किलोग्राम वजनी AFR सैटेलाइट, जिसे ABA First Runner कहा जाता है, ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन यानी ISS की तस्वीरें लीं.

ISS पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर कक्षा में घूमता है. AFR सैटेलाइट ने करीब 250 से 300 किलोमीटर की दूरी से ISS को दो बार ट्रैक किया और कुल 15 तस्वीरें लीं. यह काम आसान नहीं था, क्योंकि दोनों ऑब्जेक्ट तेज रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे थे. तस्वीरें सूरज की विपरीत दिशा से ली गईं, ताकि साफ इमेज मिल सके.

यह पहली बार है जब भारत की किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक कर उसकी तस्वीरें लेने की क्षमता दिखाई है.

यह तकनीक क्यों अहम है?

आज भारत के 50 से ज्यादा सैटेलाइट अलग-अलग कक्षाओं में काम कर रहे हैं और उनकी कुल कीमत हजारों करोड़ रुपये है. ऐसे में अंतरिक्ष में मौजूद अपने एसेट्स की सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है.

ऑर्बिट स्नूपिंग जैसी तकनीक से यह पता लगाया जा सकता है कि कोई विदेशी सैटेलाइट भारतीय सैटेलाइट के पास तो नहीं आ रहा या उसकी गतिविधियां संदिग्ध तो नहीं हैं. यह मिसाइल ट्रैकिंग और संभावित खतरे की पहचान में भी मदद कर सकती है. अंतरिक्ष में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इसे भविष्य की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

क्या यह जासूसी है?

तकनीकी रूप से देखें तो किसी सैटेलाइट के पास जाकर उसकी तस्वीर लेना निगरानी की श्रेणी में आता है. हालांकि अंतरिक्ष अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में है और वहां गतिविधियां खुले तौर पर ट्रैक की जाती हैं. दुनिया की बड़ी स्पेस ताकतें, जैसे अमेरिका, रूस और चीन, पहले से ही स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम विकसित कर चुकी हैं. भारत भी धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है.

भारत के पास कितनी क्षमता?

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और रक्षा क्षेत्र में काम कर रही संस्थाएं पहले से ही अंतरिक्ष निगरानी से जुड़े सिस्टम पर काम कर रही हैं. निजी कंपनियों के शामिल होने से यह क्षमता और मजबूत हो सकती है. अजिस्टा स्पेस का यह प्रयोग दिखाता है कि भारत अब सिर्फ लॉन्चिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में सक्रिय निगरानी और तकनीकी प्रदर्शन की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है.

यह भी पढ़ें: दुनिया के किन देशों में सबसे पहले खत्म होगा पेट्रोल-डीजल, किस पायदान पर हैं भारत-पाकिस्तान?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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