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क्या है ई-सिगरेट, आम सिगरेट से कितनी खतरनाक? टीएमसी सांसद पर संसद में स्मोकिंग के आरोपों के बीच जानिए जवाब

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने एक गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सदन में एक टीएमसी सांसद ई-सिगरेट का यूज कर रहे थे. इस आरोप ने सियासत तेज कर दी है.

भारत की संसद को देश के सबसे सम्मानित संस्थानों में गिना जाता है. यहां होने वाली हर बहस, हर बयान और हर घटना पर पूरे देश की नजर रहती है. ऐसे में, जब लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान यह आरोप लगा कि एक सांसद ने सदन के भीतर ई-सिगरेट पी तो माहौल गर्म होना तय था. दरअसल, जब लोकसभा की कार्यवाही चल ही रही थी, तभी बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने एक गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सदन में एक टीएमसी सांसद ई-सिगरेट का यूज कर रहे थे, जो न सिर्फ नियमों के खिलाफ है. उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था.

इस आरोप ने तुरंत हंगामा खड़ा कर दिया और विपक्ष–सत्ता पक्ष के बीच जमकर तकरार शुरू हो गई. स्पीकर ने साफ कर दिया कि किसी भी सांसद को ई-सिगरेट, धूम्रपान या किसी भी तरह की प्रतिबंधित चीज की अनुमति नहीं है और अगर ऐसा कोई मामला साबित होता है तो कार्रवाई जरूर होगी. ऐसे में इस घटना ने अचानक देशभर में एक सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ई-सिगरेट क्या है और जब इसे भारत में बैन किया जा चुका है, तब यह मुद्दा इतना गंभीर क्यों है. तो आइए जानते हैं कि ई-सिगरेट क्या है और ये आम सिगरेट से कितनी खतरनाक है.  

ई-सिगरेट क्या होती है?

ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसमें तंबाकू को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसमें एक लिक्विड होता है जिसे गर्म करके भाप बन जाता है और इसे यूज करने वाला इंसान उस भाप को अंदर खींचता है. यही भाप निकोटीन, फ्लेवर और केमिकल से भरी होती है. इसे ENDS यानी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम भी कहा जाता है. यह अलग-अलग डिजाइन जैसे पेन जैसे आकार में, USB या छोटी पेन ड्राइव जैसी और आम सिगरेट या सिगार जैसे आकार में मिलती हैं.

ई-सिगरेट कैसे काम करती है?

ई-सिगरेट के अंदर बैटरी, हीटिंग कॉइल और निकोटीन या फ्लेवर्ड लिक्विड होती हैं. जैसे ही डिवाइस ऑन होती है, बैटरी उस लिक्विड को गर्म करके धुआं नहीं बल्कि भाप बनाती है. इस भाप को लोग सांस के साथ अंदर लेते हैं. यह देखने में साधारण लगती है, लेकिन इसमें मौजूद निकोटीन और दूसरे केमिकल उतने ही नुकसान वाले होते हैं जितने नॉर्मल सिगरेट में पाए जाते हैं. 

भारत में ई-सिगरेट क्यों बैन है?

2019 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 लागू करके ई-सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया. इस कानून के तहत उत्पादन, बिक्री, आयात-निर्यात, खरीद-फरोख्त, विज्ञापन और भंडारण सब पूरी तरह अवैध है. सरकार का कहना है कि यह फैसला युवाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था, क्योंकि वे ई-सिगरेट के स्वास्थ्य खतरों से अनजान थे और इसे कूल या सेफ समझकर इस्तेमाल कर रहे थे. अगर कोई ई-सिगरेट के साथ पकड़ा जाए तो पहली बार गलती पर 1 साल तक जेल, 1 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. इसके अलावा दोबारा पकड़े जाने पर 3 साल तक जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकते हैं. अगर कोई ई-सिगरेट स्टोर करते हुए पकड़ा जाता है तो  6 महीने तक की जेल या 50,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. 

ई-सिगरेट आम सिगरेट से कितनी खतरनाक? 

बहुत से लोग मानते हैं कि ई-सिगरेट कम खतरनाक होती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मानना गलत है. इन दोनों में निकोटीन मौजूद होता है और ई-सिगरेट में कई ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो शरीर पर लंबे समय में गंभीर असर डालते हैं. WHO भी यह साफ कह चुका है कि ई-सिगरेट हार्ट डिजीज बढ़ा सकती है, प्रेग्नेंसी पर बुरा असर डाल सकती है और निकोटीन की तेज लत लगाती है. 

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