Western Disturbance: क्या होता है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस? जिसकी वजह से बार-बार बिगड़ रहा मौसम
Western Disturbance: वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से भारत के कई राज्यों में इस समय मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. आइए जानते हैं क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस.

- पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उत्पन्न होकर भारत तक पहुँचता है।
- यह तूफान अपने साथ नमी लाता है, जो बारिश और बर्फबारी कराता है।
- पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत में बेमौसम बारिश हो रही है।
- इस बेमौसम बारिश से रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं को नुकसान।
Western Disturbance: अप्रैल के इस महीने में बेमौसम बारिश ने पूरे उत्तर भारत में आम जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है. इससे तापमान में भारी गिरावट देखने को मिल रही है और फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इन अचानक हुए बदलावों का कारण एक बार-बार होने वाली मौसमी घटना को बताया है. इस घटना को वेस्टर्न डिस्टरबेंस के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस.
भूमध्य सागर में जन्मा एक तूफान
वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक गैर मानसूनी तूफानी प्रणाली है. इसकी उत्पत्ति भूमध्य सागर के ऊपर होती है. यह एक कम दबाव वाली प्रणाली के रूप में बनता है और दक्षिण एशिया की ओर अपनी यात्रा शुरू करता है. इस सफर के दौरान यह अपने साथ नमी भी बटोरता चलता है.
यूरोप से भारत तक
यह प्रणाली ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों से होते हुए पूर्व की तरफ बढ़ती है. आखिर में यह उत्तर पश्चिमी भारत तक पहुंचती है. इसकी रफ्तार ऊपरी वायुमंडल में चलने वाली तेज हवाओं की धाराओं द्वारा कंट्रोल की जाती है. इन धाराओं को पश्चिमी जेट स्ट्रीम कहा जाता है.
यह बारिश और बर्फ क्यों लाता है?
क्योंकि यह प्रणाली अपने साथ नमी लेकर आती है इस वजह से यह भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर उस नमी को बरसा देती है. सर्दियों के मौसम में यही वजह है कि उत्तरी मैदानी इलाकों में बारिश होती है और हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है. यही कारण है कि भारत में सर्दियों के मौसम में होने वाली बारिश के लिए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का होना काफी ज्यादा जरूरी माना जाता है.
मौसम में अचानक बदलाव
वेस्टर्न डिस्टरबेंस के आने के साथ ही अक्सर आसमान में बादल छा जाते हैं, तेज हवाएं चलने लगती हैं, ओले गिरते हैं और तापमान में गिरावट देखने को मिलती है. इसके प्रभाव से अप्रैल का महीना भी फरवरी जैसा महसूस होने लगता है. इस वक्त यह प्रभाव पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में देखने को मिल रहा है.
बेमौसम बारिश और फसलों को नुकसान
हालांकि सर्दियों के मौसम में इस तरह के डिस्टरबेंस का आना एक सामान्य बात है लेकिन मार्च और अप्रैल के महीनों में इनके आने से बेमौसम बारिश होती है. इस बारिश की वजह से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव गेहूं की फसल पर पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह फसल इस समय तक कटाई के लिए लगभग तैयार हो चुकी होती है.
अगर वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से बारिश मध्यम मात्रा में हो तो इससे रबी की फसलों को बढ़ाने में मदद मिलती है. लेकिन अगर यह बारिश काफी ज्यादा मात्रा में हो या फिर बेमौसम हो तो इससे फसलें बर्बाद हो सकती हैं.
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Source: IOCL



























