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10 या इससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप क्यों नहीं आते, अगर ऐसा हुआ तो इस 'महाभूकंप' से कितनी होगी तबाही?

म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है. इस भूकंप में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सोचिए अगर 10 या इससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आ जाए तो क्या होगा?

Earthquake: म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप के झटके 900 किलोमीटर दूर बैंकॉक तक महसूस हुए. दोनों देशों में भीषण तबाही हुई, जिसमें हजारों इमारतें जमींदोज हो गई. इस विनाशकारी भूकंप में 1000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. हजारों लोग घायल हैं और मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है. ऐसे में क्या आपने सोचा है क्या कभी इससे भी बड़ा भूकंप आ सकता है? क्या 10 या इससे ज्यादा तीव्रता का महाभूकंप आ सकता है? दुनिया का सबसे बड़ा भूकंप कब और कहां आया था? 

कब आया था दुनिया का सबसे बड़ा भूकंप

म्यांमार में आया भूकंप 7.7 तीव्रता का था. हालांकि, दुनिया के कई हिस्सों में इससे भी बड़े भूकंप आ चुके हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप आते रहते हैं, लेकिन सबसे बड़ा भूकंप अब तक 9.5 तीव्रता का था, जो चिली में आया था. यह अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप था, जिसके गई गांव के गांव खत्म हो गए थे. इस भूकंप में 61 लोग मारे गए थे. यह भूकंप 1960 में आया था, जिसमें 10 मिनट तक धरती हिलती रही थी. इस भूकंप की फाल्ट लाइन 1000 मील लंबी थी. 

क्या 10 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप भी आ सकता है?

म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है. इस भूकंप में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है, लेकिन सोचिए अगर 10 या इससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आ जाए तो क्या होगा? क्या ऐसा संभव है. एक्सपर्ट्स की मानें तो 10 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप आना संभव नहीं है. दरअसल, कोई भी भूकंप इसकी फाल्ट की लंबाई पर निर्भर करता है. फाल्ट लाइन जिनती ज्यादा लंबी होगी, भूकंप की तीव्रता उतनी ही ज्यादा होगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि 10 या 10 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप पैदा करने के लिए पृथ्वी के अंदर कोई फाल्ट लाइन मौजूद नहीं है. अगर ऐसी कोई फाल्ट लाइन हो और इतना विनाशकारी भूकंप आए तो इसका असर पूरी पृथ्वी पर होगा और भूकंप के झटके पृथ्वी के अधिकांश हिस्से में फैल जाएंगे.

यह भी पढ़ें: क्या कई देशों में एक साथ आ सकता है भूकंप, थाईलैंड-म्यांमार और भारत में आए भूकंप में क्या कनेक्शन?

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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