ईरान में क्या पढ़ने जाते हैं भारतीय छात्र, जानें कितनी सस्ती है वहां की पढ़ाई?
ईरान में बढ़ते हुए तनाव के बीच भारतीयों को वापस आने के लिए कह दिया गया है. आइए जानें कि ईरान में छात्र क्या पढ़ने के लिए जाते हैं और वहां पढ़ाई कितनी सस्ती है.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान स्थित भारतीय दूतावास से एक अपील आई है कि भारतीय नागरिक जल्द देश में लौट आएं. इस अपील ने वहां पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में सवाल उठने लगे कि आखिर इतने भारतीय छात्र ईरान क्यों जाते हैं? क्या वजह है कि भारत छोड़कर वे हजारों किलोमीटर दूर पढ़ाई करने का फैसला करते हैं? इसका जवाब सीधा है- सस्ती मेडिकल शिक्षा और सीमित सीटों की मजबूरी, आइए समझें.
ईरान में कितने भारतीय छात्र?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल में ईरान को लेकर चल रही खबरों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि वे कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो कड़े कदम भी उठाए जाएंगे. इसी बीच ईरान में हालात बिगड़ने की आशंका के चलते भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और स्थिति के अनुसार देश लौटने की सलाह दी है.
ईरान में भारतीय छात्रों की संख्या कम नहीं है. बीबीसी की रिपोर्ट बताती है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022 तक वहां करीब 1500 भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे. ऐसे में हर भू-राजनीतिक हलचल सीधे तौर पर इन छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित करती है.
आखिर ईरान क्यों जाते हैं भारतीय छात्र?
सबसे बड़ा कारण है मेडिकल की सस्ती पढ़ाई. भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित हैं और प्रतियोगिता बेहद कठिन है. निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस इतनी ज्यादा होती है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वहन करना मुश्किल हो जाता है.
ईरान की कई यूनिवर्सिटीज डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री देती हैं, जिसे भारत में एमबीबीएस के बराबर माना जाता है. वहां सालाना फीस लगभग 6 लाख रुपये तक हो सकती है. पूरे छह साल के कोर्स की कुल फीस 15 से 30 लाख रुपये के बीच रहती है. यह खर्च भारत के कई निजी कॉलेजों से काफी कम है, जहां कुल फीस 35 लाख से लेकर 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.
कौन-कौन सी यूनिवर्सिटी हैं पसंदीदा?
भारतीय छात्रों के बीच University of Tehran, Shahid Beheshti University, Iran University of Medical Sciences, Tehran University of Medical Sciences और Islamic Azad University जैसी संस्थाएं लोकप्रिय हैं. इन विश्वविद्यालयों में मेडिकल शिक्षा के साथ आधुनिक लैब, अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की सुविधा मिलती है. यही वजह है कि सीमित बजट वाले छात्र यहां का रुख करते हैं.
धार्मिक शिक्षा भी है एक वजह
मेडिकल के अलावा कुछ भारतीय छात्र धार्मिक शिक्षा के लिए भी ईरान जाते हैं. खासकर शिया समुदाय से जुड़े छात्र कुम और मशहद जैसे शहरों में पढ़ाई करते हैं. कुम, जो तेहरान से लगभग 150 किलोमीटर दूर है, शिया धार्मिक शिक्षा का बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां कई बड़े मदरसे हैं जहां आधुनिक विषयों के साथ धार्मिक अध्ययन भी कराया जाता है. कुछ मामलों में धार्मिक शिक्षा का खर्च ईरानी संस्थानों या सरकार की ओर से वहन किया जाता है.
भारत में मेडिकल पढ़ाई का खर्चा
भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेज सबसे सस्ते माने जाते हैं. अगर किसी छात्र को सरकारी सीट मिल जाती है, तो पूरे 5.5 साल के कोर्स का कुल ट्यूशन खर्च लगभग 1 लाख से 5 लाख रुपये तक हो सकता है. All India Institute of Medical Sciences जैसे संस्थानों में तो कुल फीस 6,000 से 30,000 रुपये तक भी हो सकती है, लेकिन यहां एंट्री पाना बेहद कठिन है.
वहीं भारत में निजी मेडिकल कॉलेजों में सालाना फीस 7 लाख से 25 लाख रुपये तक हो सकती है. कई डीम्ड यूनिवर्सिटी में पूरे कोर्स का खर्च 1 करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच जाता है. इसमें हॉस्टल, मेस और अन्य खर्च अलग से होते हैं.
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Source: IOCL

























