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भूकंप से दहले थाईलैंड-म्यांमार में फंसे भारतीयों के लिए क्या कर सकती है मोदी सरकार, क्या होता है प्रोटोकॉल?

थाईलैंड और म्यांमार में आए भूकंप के बाद भारत एक्टिव हो गया है. भारतीय अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा है, साथ ही विदेश मंत्रालय से प्रभावित देशों की सरकारों के संपर्क में रहने को कहा गया है.

Earthquake in Myanmar: म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है. दोनों देशों से सामने आ रही तस्वीरें डारने वाली हैं. यहां कई बड़ी-बड़ी इमारतें जमींदोज हो गए हैं, जिसमें कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. हालांकि, किसी भी देश की ओर से अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं. बता दें, भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक महसूस किए गए. इसके ठीक 12 मिनट बाद 7 तीव्रता का दूसरा भूकंप आया. कहा जा रहा है कि इस भूकंप का केंद्र बैंकॉक था. 

थाईलैंड और म्यांमार में आए भूकंप के बाद भारत एक्टिव हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनाशकारी भूकंप के बाद दोनों देशों के साथ भारत की पूर्ण सहानुभूति व्यक्त की है साथ ही संकट की इस घड़ी में हर संभव मदद का ऐलान कर दिया है. पीएम मोदी ने इस संदर्भ में भारतीय अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा है, साथ ही विदेश मंत्रालय से भी म्यांमार और थाईलैंड की सरकारों के संपर्क में रहने को कहा गया है. ऐसे में सवाल यह है कि भूकंप से प्रभावित देशों की मदद के लिए भारत सरकार क्या कर सकती है? क्या यहां फंसे भारतीयों को भारत सरकार वापस बुला सकती है? इसका प्रोटोकॉल क्या होता है? आइए जानते हैं... 

भारत पहली बार नहीं कर रहा दूसरे देश की मदद

म्यांमार और बैंकॉक में आए भूकंप के बाद यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी दूसरे देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया हो, भारत ऐसा पहले भी कर चुका है. 2023 में तुर्की में आए भूकंप के दौरान भी भारत ने बड़ी मात्रा में राहत सामग्री भेजी थी, जिसमें चिकित्सीय उपकरण, भोजन सामग्री, फर्स्ट एड किट, डॉक्टर्स, मोबाइल हॉस्पिटल भेजे थे. अब भारत ने एक बार फिर से पड़ोसी धर्म निभाते हुए संकटग्रस्त देशों को मदद का ऐलान किया है. 

भारतीयों के लिए क्या कर सकती है मोदी सरकार

म्यांमार और थाईलैंड जैसे देश में बड़ी संख्या में भारतीय लोग भी रहते हैं. ऐसे में मोदी सरकार की प्राथमिकता भारतीयों की सुरक्षा होगी. ऐसे में भारत सरकार दोनों देशों में मौजूद भारतीय दूतावासों से इस बारे में जानकारी ले सकती है. इसके बाद दूतावास वहां की सरकार से संपर्क करके फंसे हुए भारतीयों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर सकती है. इतना ही नहीं भारत सरकार इन भारतीयों को बेहतर उपचार के लिए भारत भी ला सकती है. 

यह भी पढ़ें: कितने हजार किलोमीटर तक होता है 7.2 मैग्नीट्यूड के भूकंप का असर, कितनी हो सकती है तबाही? 

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