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Assembly Election 2026: दूसरे दल से बीजेपी में आए कितने लोग अब तक बन चुके हैं मुख्यमंत्री? चौंका देंगे ये नाम

Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं उन नेताओं के बारे में जिन्होंने बीजेपी में आने के बाद मुख्यमंत्री का पदभार संभाला.

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  • कई नेता जिन्होंने कांग्रेस या क्षेत्रीय दलों से शुरुआत की, भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री बने।
  • हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस छोड़कर 2021 में असम के मुख्यमंत्री बने।
  • पेमा खांडू, एन बीरेन सिंह, माणिक साहा भाजपा में आकर मुख्यमंत्री बने।
  • बसवराज बोम्मई ने जद(यू) से भाजपा में आकर कर्नाटक के सीएम पद संभाला।

Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के पहले चरण के लिए वोटिंग चल रही है. इसमें 152 सीटों पर मतदान हो रहा है. इसी के साथ तमिलनाडु में भी 234 सीटों पर वोटिंग हो रही है. भारतीय राजनीति में एक ट्रेंड साफ तौर पर उभर कर सामने आया है. आइए जानते हैं उन नेताओं के बारे में जिन्होंने अपनी पार्टी बदली और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर मुख्यमंत्री बने.

भारतीय राजनीति में बढ़ता हुआ एक ट्रेंड 

बीते कुछ सालों में बीजेपी एक ऐसी पार्टी के तौर पर उभरी है जो न सिर्फ अपने अंदर से नेताओं को तैयार करती है बल्कि दूसरे राजनीतिक बैकग्राउंड से आए प्रभावशाली चेहरों को भी अपने साथ जोड़ती है. कई ऐसे नेता जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंडियन नेशनल कांग्रेस या फिर किसी क्षेत्रीय पार्टी से की थी भाजपा में शामिल होने के बाद वे राजनीति के शिखर तक पहुंचे हैं.

हिमंत बिस्वा सरमा

इसके सबसे बड़े उदाहरण हिमंत बिस्वा सरमा हैं. कांग्रेस में लगभग दो दशक बीतने के बाद वे 2015 में बीजेपी में शामिल हो गए. कुछ ही सालों के अंदर 2021 में वे असम के मुख्यमंत्री बन गए. यह हाल के समय में हुए सबसे तेज राजनीतिक बदलाव में से एक है. 

पेमा खांडू

पेमा खांडू का मामला थोड़ा अलग है. मूल रूप से कांग्रेस से जुड़े पेमा खांडू ने पहले पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल का दामन थामा और बाद में भाजपा में शामिल हो गए. यह सब तब हुआ जब वे पहले से ही अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर थे. उनके इस कदम से भाजपा को पूर्वोत्तर भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने में काफी मदद मिली. 

एन बीरेन सिंह

एन बीरेन सिंह ने 2016 में कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए. ठीक 1 साल बाद उन्होंने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया और 2017 में मणिपुर के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने. यह इस बात का जीता जागता सबूत है कि राजनीतिक समीकरण कितनी तेजी से बदल सकते हैं. 

माणिक साहा

माणिक साहा का पहले कांग्रेस से जुड़ाव था. 2016 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे पार्टी में अपनी जगह बनाई और 2022 में अपने पूर्ववर्ती के इस्तीफे के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बने.

बसवराज बोम्मई

भरपूर मुख्यमंत्री की बात करें तो इसमें बसवराज बोम्मई का नाम काफी ज्यादा अहम है. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा जनता दल से शुरू की. इसके बाद 2008 में वे भाजपा में शामिल हो गए. बाद में 2021 में वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने.

यह भी पढ़ें: बिना सीएम होते हुए भी इन राज्यों में सत्ता में है कांग्रेस, देख लीजिए लिस्ट

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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