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Watermelon Fruit: सबसे पहले कहां हुई थी तरबूज की पैदावार, भारत में कैसे पहुंचा ये सुपरफ्रूट

भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है. गर्मी से बचने के लिए लोग हर तरह का उपाय कर रहे हैं. गर्मी के कारण ही बाजार में तरबूज की ब्रिकी भी तेजी से बढ़ गई है. लेकिन आखिर तरबूज की पैदावार सबसे पहले कहां हुई थी?

राजधानी दिल्ली समेत पूरे देशभर में भीषण गर्मी पड़ रही है. गर्मी बढ़ने के साथ ही लोग अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए अधिकांश लोग तरबूज का भी सेवन कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तरबूज की सबसे पहले पैदावार कहां हुई थी. अगर आप भारत का नाम लेंगे तो ये गलत जवाब है. आज हम आपको बताएंगे कि सबसे पहले तरबूज की पैदावार कहां हुई थी. 

गर्मी में तरबूज

गर्मी में तरबूज खाना ज्यादा लोग पसंद करते हैं. क्योंकि तरबूज में भरपूर मात्रा में पानी पाया जाता है, जिसको खाने से हमारा शरीर डिहाइड्रेट नहीं होता है.वहीं इसमें आयरन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. बता दें कि आजकल बाजार में लाल के अलावा पीला तरबूज भी मिलने लगा है. 

सबसे पहले कहां मिला तरबूज

एक शोध के मुताबिक तरबूज की सबसे पहले पैदावार दक्षिण अफ्रिका में नहीं बल्कि मिस्र में हुआ था. प्रोसिडिगंस ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित अध्ययन में घरेलू तरबूज की उत्पत्ति की कहानी फिर से लिखी गई है. वैज्ञानिकों ने सैकड़ों प्रजातियों वाले तरबूज के डीएनए के अध्ययन में पाया कि ये फल उत्तरपूर्वी अफ्रीका की जगंली फसल से आए थे. इस अध्‍ययन से पहले तक कहा जाता रहा है कि तरबूज दक्षिण अफ्रीकी सिट्रॉन मेलन की श्रेणी में ही आते हैं. 

लेकिन अब जेनेटिक शोध के नतीजे मिस्र की एक पेंटिंग से मेल खाते हैं, जिसमें दिख रहा है कि तरबूज 4 हजार साल पहले के समय से नील नदी के रेगिस्तान में खाए जाते थे. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के आर्ट्स एंड साइंसेस में बायोलॉजी की प्रोफेसर सुजैन एस. रेनर के मुताबिक डीएनए के आधार पर उनकी टीम ने पाया कि मौजूदा लाल और मीठा तरजूब पश्चिम व उत्तर पूर्व अफ्रीका के जंगली तरबूज के सबसे करीब है. रेनर इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट हैं, जो डेढ़ दशक से ज्‍यादा समय तक जर्मनी की म्यूनिख में लुडविंग मैक्जिमिलन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर काम करने के बाद वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई हैं. यह जेनेटिक रिसर्च न्यूयॉर्क में अमेरिकी कृषि विभाग, लंदन में क्वे के द रॉयल बॉटेनिक गार्डन और शेफील्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से पूरी हुई है.

लाल और पीला तरबूज 

तरबूज का नाम लेते ही सबसे पहले लाल रंग दिमाग में आता है. लेकिन अब बाजार में लाल और पीला दोनों रंग का तरबूज बाजार में आता है. जानकारी के मुताबिक तरबूज में एक केमिकल के कारण इनका रंग लाल या पीला होता है. दरअसल लायकोपीन नाम का केमिकल ही लाल और पीले तरबूज में अंतर का कारण है. लाल तरबूज में लायकोपीन केमिकल पाया जाता है. वहीं पीले तरबूज में यह केमिकल नहीं होता है. पीले तरबूज का स्‍वाद शहद की तरह होता है. इसमें विटामिन ए और सी पर्याप्‍त मात्रा में पाए जाते हैं.

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