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क्या किसी देश के चुनाव भी कंट्रोल कर सकते हैं ट्रंप, वेनेजुएला में किस अधिकार से दे रहे आदेश?

डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा वेनेजुएला में चुनाव टालने के फैसले ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है. सवाल यही है कि क्या कोई बाहरी ताकत किसी देश के लोकतांत्रिक फैसलों को दिशा दे सकती है या नहीं.

किसी देश की जनता कब वोट डालेगी, इसका फैसला आखिर कौन करता है वह देश या कोई बाहरी ताकत? वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद अचानक चुनाव टलने की घोषणा ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है. अमेरिका की ओर से आए बयानों ने बहस छेड़ दी है कि क्या किसी देश का राष्ट्रपति दूसरे देश के चुनावों पर असर डाल सकता है. राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई सवाल खड़े हो गए हैं.

वेनेजुएला में सत्ता बदलने के बाद नया मोड़

वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद हालात तेजी से बदले हैं. लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक संकट झेल रहे इस देश में अब अंतरराष्ट्रीय दबाव भी खुलकर सामने आ गया है. अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि वेनेजुएला में तुरंत चुनाव कराना सही नहीं होगा. अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि पहले देश को स्थिर करना और हालात संभालना जरूरी है. 

मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिका की भूमिका

अमेरिकी ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उन्हें अमेरिका की अदालत में पेश किया गया. इसी घटनाक्रम के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया. ट्रंप ने कहा कि अगले 30 दिनों के भीतर वेनेजुएला में चुनाव नहीं कराए जाएंगे. इस बयान ने साफ कर दिया कि अमेरिका इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक भूमिका निभा रहा है. 

चुनाव टालने की वजह क्या बताई गई

अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला इस समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है. ऐसे माहौल में चुनाव कराने से हालात और बिगड़ सकते हैं. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पहले कानून-व्यवस्था, प्रशासन और जरूरी सेवाओं को पटरी पर लाना जरूरी है, उसके बाद ही निष्पक्ष चुनाव संभव होंगे.

क्या अमेरिका को ऐसा कहने का अधिकार है

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी संप्रभु देश के चुनाव उसकी जनता और वहां की संस्थाओं का मामला होते हैं. किसी बाहरी देश को सीधे तौर पर चुनाव की तारीख तय करने का अधिकार नहीं होता है. हालांकि, शक्तिशाली देश अक्सर राजनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक बयानबाजी के जरिए असर जरूर डालते हैं. सीधे तौर पर कहें तो डोनाल्ड ट्रंप कानूनी तौर पर वेनेजुएला में चुनाव टालने का कोई सीधा अधिकार नहीं रखते हैं.

ट्रंप का बयान और बढ़ती बहस

डोनाल्ड ट्रंप का बयान इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यह सीधे तौर पर समयसीमा से जुड़ा है. जब अमेरिका जैसा देश कहता है कि चुनाव 30 दिन में नहीं होंगे, तो इसे सिर्फ सलाह नहीं बल्कि दबाव के तौर पर देखा जाता है. कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान वेनेजुएला की आंतरिक राजनीति में दखल जैसा लगता है. 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्यों अहम

वेनेजुएला के मामले पर दुनिया की नजरें टिकी हैं. कुछ देश अमेरिका के रुख का समर्थन करते नजर आ सकते हैं, जबकि कई इसे संप्रभुता में हस्तक्षेप मान सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठना तय माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव किसी भी लोकतांत्रिक देश की बुनियाद होते हैं.

यह भी पढ़ें: अमेरिका और ट्रंप को आंखें दिखाने वाले कोलंबिया में किस धर्म का दबदबा, जानें कितने मुस्लिम?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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