किसी से नस्लीय भेदभाव किया तो कितनी मिलती है सजा, भारत में इस पर क्या कानून?
नस्लीय भेदभाव और अन्याय को भी उजागर किया. ख्वाजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण उनके साथ अलग और अक्सर unfair व्यवहार किया गया.

ऑस्ट्रेलिया के ओपनिंग क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की. सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में खेली जाने वाली एशेज सीरीज का आखिरी टेस्ट उनका अंतिम मैच होगा. अपने संन्यास की घोषणा के साथ-साथ उन्होंने अपने करियर में झेले गए नस्लीय भेदभाव और अन्याय को भी उजागर किया. ख्वाजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण उनके साथ अलग और अक्सर unfair व्यवहार किया गया.
ख्वाजा की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि खेल के मैदान पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के हर हिस्से में नस्लीय भेदभाव (Racism) मौजूद है. भारत में भी यह समस्या गंभीर है. ऐसे में नस्लीय भेदभाव कानून और इसके तहत मिलने वाली सजा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. तो चलिए जानते हैं कि किसी से नस्लीय भेदभाव किया तो कितनी सजा मिलती है और भारत में इस पर क्या कानून है.
भारत में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ कानून
भारत के संविधान और बीएनएस में कुछ प्रावधान मौजूद हैं जो नस्ल या जाति के आधार पर भेदभाव रोकते हैं. संविधान के अनुच्छेद 15 और 16, धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान और नस्ल के आधार पर भेदभाव करना गैरकानूनी है. बीएनएस 153A किसी समूह के खिलाफ दुश्मनी या घृणा फैलाना अपराध है. इसके तहत 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. प्रस्तावित धाराएं 153C नस्लीय हिंसा के लिए 5 साल तक की जेल और जुर्माना, 509A, किसी नस्ल विशेष का अपमान करने पर दंड है. इसके अलावा भारत ने ICERD (अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सभी नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर) को अपनाया और इसे घरेलू कानून (PHRA, 1993) में लागू किया.
किसी से नस्लीय भेदभाव किया तो कितनी सजा मिलती है?
अगर भारत में किसी के साथ नस्लीय भेदभाव किया जाता है, तो कानून के अनुसार धारा 153 C के तहत 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. प्रस्तावित नई धाराओं के लागू होने पर 5 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. हालांकि, पुलिस अक्सर इन मामलों को सामान्य अपराधों के रूप में दर्ज कर देती है, जिससे दोषियों को सख्त सजा नहीं मिल पाती है.
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