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Zoom Call या Google Meet, होर्मुज के मसले पर 60 देशों ने एक साथ कैसे की मीटिंग? जानें तरीका

Hormuz Meeting: हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रहे तनाव को ध्यान में रखकर 60 से ज्यादा देशों ने एक वर्चुअल बैठक की. आइए जानते हैं कि यह बैठक कैसे संभव हो पाई.

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  • होर्मुज जलडमरूमध्य के तनाव पर 60 देशों की बैठक हुई।
  • समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति पर वर्चुअल शिखर सम्मेलन आयोजित।
  • सुरक्षित सरकारी नेटवर्क से कूटनीतिक बैठकें आयोजित की गईं।
  • नियंत्रित नेटवर्क के जरिए अधिकृत प्रतिभागियों की ही पहुंच।

Hormuz Meeting: होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डाल रहा है. इसी को लेकर हाल ही में 60 से ज्यादा देश यूनाइटेड किंगडम की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक के लिए एक साथ आए. इसका मकसद साफ था, समुद्री सुरक्षा बहाल करना और तेल आपूर्ति को स्थिर करना. लेकिन इसमें एक बड़ा सवाल उठता है. आखिर इतने सारे देश एक ही समय पर एक ही बैठक में कैसे शामिल हुए? क्या यह जूम या फिर गूगल मीट के जरिए संभव हुआ? आइए जानते हैं.

नहीं थी कोई आम वीडियो कॉल 

आम धारणाओं के उलट ऐसी वैश्विक कूटनीतिक बैठकें जूम या फिर गूगल मीट जैसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर नहीं की जातीं. ये टूल व्यवसाय और आम इस्तेमाल के लिए सुविधाजनक हैं. लेकिन संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय चर्चा के लिए इन्हें उतना सुरक्षित नहीं माना जाता. इसके बजाय यह एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन था. यह एक बेहद नियंत्रित और गोपनीय डिजिटल बैठक थी, जहां दुनिया भर के नेता और अधिकारी अपने देश से खास प्रणालियों के जरिए जुड़े.

बेहद सुरक्षित सरकारी नेटवर्क का इस्तेमाल 

राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ी बैठकों के लिए देश एन्क्रिप्टेड सरकारी संचार प्रणाली पर निर्भर रहते हैं. मेजबान के तौर पर यूनाइटेड किंगडम ने शायद अपने खुद के सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया होगा. इसे हैकिंग, जासूसी या फिर डेटा लीक को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. 

यह प्रणालियां सार्वजनिक एप्लीकेशन की तुलना में काफी ज्यादा एडवांस्ड होती हैं. इनमें एन्क्रिप्शन की कई परतें होती हैं और पहुंच भी काफी सीमित होती है. सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सटीक प्लेटफार्म के बारे में कभी भी सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया जाता. 

60 देश एक बैठक में कैसे शामिल हुए 

तकनीकी रूप से इतनी बड़ी बैठक को कोऑर्डिनेटीड डिजिटल नेटवर्क के जरिए संभव बनाया जाता है. हर भाग लेने वाला देश सुरक्षित कूटनीतिक चैनलों के जरिए जुड़ता है और अक्सर सरकारी कार्यालय या फिर दूतावास में मौजूद खास टर्मिनलों का इस्तेमाल करता है. किसी एक ओपन कॉल के बजाय यह प्रणाली एक नियंत्रित नेटवर्क की तरह काम करती है. यहां सिर्फ अधिकृत प्रतिभागियों को ही पहुंच दी जाती है. इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे दुनिया के बड़े देश शामिल थे.

यह भी पढ़ें: नई करेंसी लॉन्च करने के लिए कौन देता है परमीशन, जान लीजिए पूरा तरीका

 

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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