India Maritime Border: भारत की समुद्री सीमा कहां तक है, कहां तक Indian Navy की हो सकती है तैनाती; कैसे होता है तय?
India Maritime Border: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता ही जा रहा है. हाल ही में अमेरिका ने भारत से लौट रही ईरानी वॉरशिप को निशाना बनाया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर भारत की समुद्री सीमा कितनी है.

India Maritime Border: मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास के संकट के बीच भारत सरकार फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों की सुरक्षा के लिए इंडियन नेवी को तैनात करने पर विचार कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले पर जल्द ही फैसला लिया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर हिंद महासागर में एक अमेरिकी सबमरीन द्वारा भारत से लौट रहे ईरानी वॉरशिप को डुबोए जाने की खबरों ने भी ध्यान खींचा है. इसी बीच लोगों के बीच एक सवाल उठ रहा है कि भारत की समुद्री सीमा कितनी दूर तक फैली है और इंडियन नेवी कानूनी तौर पर कहां तक काम कर सकती है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कैसे तय की गई है भारत की समुद्री सीमाएं?
भारत की समुद्री सीमाएं यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी 1982 के मुताबिक तय की गई हैं. ये इंटरनेशनल नियम भारत में टेरिटोरियल वाटर्स, कॉन्टिनेंटल शेल्फ, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन और दूसरे मैरिटाइम जोन एक्ट 1976 के जरिए लागू किए जाते हैं.
इन कानूनों के तहत भारत की समुद्री सीमाओं को कई जोन में बांटा गया है. यह देश के अधिकारों और नेवल डेप्लॉयमेंट के दायरे को तय करते हैं.
कहां तक फैला है टेरिटोरियल वॉटर
पहली और सबसे जरूरी समुद्री सीमा टेरिटोरियल वॉटर है. यह भारत की बेसलाइन से तट के साथ 12 नॉटिकल मील तक फैली हुई है. इस जोन को जमीनी इलाके की तरह ही देश का एक जरूरी हिस्सा माना जाता है. इस इलाके में भारत का समुद्र की सतह, समुद्र तल और यहां तक की इसके ऊपर के एयर स्पेस पर भी पूरा कंट्रोल होता है. भारतीय नेवी और तटीय सुरक्षा एजेंसियों के पास इस इलाके में कानून लागू करने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
क्या है बफर जोन?
टेरिटोरियल वॉटर के आगे एक जुड़ा हुआ जोन है. यह तट से 24 नॉटिकल मील तक फैला हुआ है. यह इलाका कानून लागू करने के लिए एक बफर जोन के तौर पर काम करता है. हालांकि यह पूरी तरह से सॉवरेन इलाका नहीं है. लेकिन भारत के पास कस्टम, टैक्स, इमीग्रेशन और प्रदूषण कंट्रोल से जुड़े कानूनों को लागू करने का अधिकार है. अधिकारी उन चाहतों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं जिन पर भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने का शक है.
क्या है एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन?
भारत के कंट्रोल में सबसे बड़ा समुद्री जोन एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन है. यह समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला है. इस जोन में भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों पर एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक अधिकार हैं. इसमें मछली पकड़ने का अधिकार, समुद्र तल से तेल और मिनरल निकालना, आर्टिफिशियल आइलैंड बनाना और साइंटिफिक रिसर्च करना शामिल है.
कहां तक काम कर सकती है भारतीय नौसेना?
मिलिट्री नजरिया से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल रेंज भारत के समुद्री जोन तक ही सीमित नहीं है. नौसेना एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन से आगे भी अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में जहाज और सबमरीन को तैनात कर सकती है. इसे आमतौर पर हाई सीज के नाम से जाना जाता है.
यह जल सीमा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के लिए खुली है. इंडियन नेवी अक्सर शिपिंग रूट और स्ट्रैटेजिक हितों की रक्षा के लिए इन इलाकों में पेट्रोलिंग और एंटी पायरेसी मिशन करती है.
इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन
जिन इलाकों में इंडिया की मैरीटाइम बाउंड्री पाकिस्तान या फिर श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ शेयर होती है, वहां पर समुद्री बॉर्डर को इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन के तौर पर बताया गया है. यह बाउंड्री देश के बीच आपसी एग्रीमेंट से तय होती है और इंटरनेशनल मैरीटाइम कानून के तहत सिद्धांतों को मानती है.
इसके अलावा आपको बता दें कि सभी मैरीटाइम जोन को एक बेसलाइन से मापा जाता है. यह आमतौर पर कोस्टलाइन के साथ सबसे कम पानी वाली लाइन होती है. यह बेसलाइन शुरुआती बिंदु का काम करती है. यहां से 12 नॉटिकल मील या फिर 200 नॉटिकल मील जैसी दूरियां कैलकुलेट की जाती हैं. जहां पर दो देशों के मैरिटाइम दावे ओवरलैप होते हैं वहां यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी गाइडलाइंस के तहत बाइलेटरल एग्रीमेंट या फिर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन के जरिए बाउंड्री तय की जाती है.
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Source: IOCL


























